Saturday, 25 July 2026

गैंग से जुड़े मामले में कमजोर पैरवी के बदले रिश्वत का आरोप, सरकारी अभियोजक ₹ 50 हजार लेते ट्रैप


गैंग से जुड़े मामले में कमजोर पैरवी के बदले रिश्वत का आरोप, सरकारी अभियोजक ₹ 50 हजार लेते ट्रैप

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जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने नीमकाथाना स्थित एसीजेएम न्यायालय क्रम-1 में पदस्थ सहायक निदेशक अभियोजन कौशल सिंह राठौड़ को कथित रूप से ₹50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पर जेल में बंद एक व्यक्ति के खिलाफ चल रहे संगठित अपराध से संबंधित मामले में अभियोजन पक्ष को कमजोर करने के बदले ₹3.25 लाख मांगने का आरोप है।

एसीबी के अनुसार, रिश्वत की मांग का सत्यापन कराने के दौरान सौदा ₹3 लाख में तय हुआ था। पहली किस्त के रूप में ₹50 हजार लेते समय सीकर एसीबी की टीम ने आरोपी को जयपुर रेलवे स्टेशन के पास पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

गंभीर धाराएं हटवाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप

शिकायतकर्ता ने एसीबी को बताया था कि उसका बेटा नीमकाथाना जेल में बंद है और उसके खिलाफ संगठित गिरोह से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोप है कि सहायक निदेशक अभियोजन ने मामले से भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(4) और धारा 308 हटवाने, अभियोजन पक्ष की पैरवी कमजोर रखने तथा बचाव पक्ष की दलीलों का प्रभावी विरोध नहीं करने के बदले ₹3.25 लाख मांगे थे।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(4) संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य होने से संबंधित है। इसमें दोष सिद्ध होने पर कम से कम पांच वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और न्यूनतम ₹5 लाख जुर्माने का प्रावधान है। धारा 308 जबरन वसूली से संबंधित है।

हालांकि कोई सरकारी अभियोजक स्वयं किसी मामले से धारा नहीं हटा सकता। धाराओं को बनाए रखने, बदलने या हटाने का अंतिम निर्णय उपलब्ध जांच सामग्री और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर संबंधित न्यायालय करता है। एसीबी का आरोप है कि आरोपी अभियोजक ने कमजोर पैरवी और धाराएं हटाने के पक्ष में रुख अपनाने का भरोसा देकर रिश्वत मांगी थी।

सत्यापन में ₹3 लाख पर तय हुआ सौदा

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने रिश्वत की मांग का गोपनीय सत्यापन कराया। इस दौरान कथित रिश्वत की राशि ₹3.25 लाख से घटकर ₹3 लाख तय हुई।

एसीबी के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार, आरोपी ने दो दिन पहले पहली किस्त के ₹50 हजार लेने के लिए शिकायतकर्ता को नीमकाथाना बुलाया था। वहां उसे संदेह हुआ तो उसने रकम नहीं ली और शिकायतकर्ता को पैसे जयपुर में देने की बात कहकर वापस भेज दिया।

शिकायतकर्ता की कार में बैठकर पहुंचा जयपुर

एसीबी के प्रारंभिक विवरण के अनुसार, गुरुवार को आरोपी शिकायतकर्ता की कार में ही नीमकाथाना से जयपुर आया। रात करीब 9:30 बजे जयपुर जंक्शन के बाहर स्थित सर्कल के पास उसने कार में ₹50 हजार की रिश्वत ली और नीचे उतर गया।

इस दौरान सीकर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में टीम अन्य वाहनों से शिकायतकर्ता की कार की निगरानी कर रही थी। आरोपी के रकम लेकर वाहन से उतरते ही टीम ने उसे पकड़ लिया। कार्रवाई में पुलिस निरीक्षक सुभाष मील और अन्य कर्मचारी भी शामिल रहे।

पैंट की जेब से बरामद हुई रकम

बताया गया है कि आरोपी ने रिश्वत के ₹50 हजार अपनी पैंट की जेब में रख लिए थे। एसीबी टीम उसे सदर थाने ले गई, जहां स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। रासायनिक परीक्षण के दौरान आरोपी के हाथों पर नोटों में लगाए गए रसायन का रंग मिलने की बात सामने आई है।

एसीबी के अनुसार, शिकायत का सत्यापन करने और कथित मांग की पुष्टि के बाद ही ट्रैप की कार्रवाई की गई थी। आरोपी से रिश्वत की मांग, संबंधित मामले में उसकी भूमिका और अन्य संभावित व्यक्तियों की संलिप्तता को लेकर पूछताछ की जा रही है।

जेल में बंद आरोपी को बताया गैंग सदस्य का सहयोगी

पुलिस के अनुसार, जिस विचाराधीन मामले में कथित रूप से रिश्वत मांगी गई, उसमें जेल में बंद व्यक्ति को रोहित गोदारा गिरोह के एक सदस्य का सहयोगी बताया गया है। दावा है कि वह पहले किसी अन्य गिरोह से भी जुड़ा रहा था। उसके पिता ने करीब पांच दिन पहले एसीबी को सरकारी अभियोजक द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत दी थी।

हालांकि जेल में बंद व्यक्ति के विरुद्ध मूल आपराधिक मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इसी तरह सहायक निदेशक अभियोजन के विरुद्ध रिश्वत संबंधी आरोप भी जांच और न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में होगी जांच

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। उसके कार्यालय, संबंधित मुकदमे की पत्रावली, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन सहित अन्य तथ्यों की जांच की जा सकती है।

एसीबी की कार्रवाई डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह की निगरानी में सीकर इकाई ने की। आगे की जांच अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला के पर्यवेक्षण में की जा रही है।

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