Saturday, 25 July 2026

मोदी मंत्रिमंडल से रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा, राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से किया स्वीकार


मोदी मंत्रिमंडल से रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा, राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से किया स्वीकार

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नई दिल्ली। केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर 24 जुलाई को उनका त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत की गई है।

सरकार की ओर से बिट्टू के इस्तीफे का कोई औपचारिक कारण नहीं बताया गया है। हालांकि उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो चुका था और भाजपा ने हाल में हुए द्विवार्षिक चुनाव में उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था।

राजस्थान से अगस्त 2024 में पहुंचे थे राज्यसभा

रवनीत सिंह बिट्टू ने वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव पंजाब की लुधियाना सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 20,942 मतों से हराया था। लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद उन्हें जून 2024 में मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था।

इसके बाद अगस्त 2024 में भाजपा ने बिट्टू को राजस्थान से राज्यसभा उपचुनाव में उतारा और वह निर्विरोध निर्वाचित हुए। यह सीट कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। राज्यसभा की यह शेष अवधि 21 जून 2026 को समाप्त हो गई।

बिना सांसद बने छह महीने मंत्री रह सकते थे

संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई व्यक्ति सांसद नहीं रहने के बाद भी लगातार छह महीने तक केंद्रीय मंत्री बना रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना आवश्यक होता है, अन्यथा छह महीने पूरे होने पर उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।

इस प्रावधान के तहत बिट्टू अपने राज्यसभा कार्यकाल की समाप्ति के बाद लगभग 21 दिसंबर तक मंत्री बने रह सकते थे। इसके बावजूद उन्होंने एक महीने के भीतर ही मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया।

तरुण चुघ ने राजस्थान से नहीं, मध्य प्रदेश से जीता चुनाव

यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है कि भाजपा ने राजस्थान की बिट्टू वाली सीट पर अमृतसर के नेता तरुण चुघ को राज्यसभा भेजा है। भाजपा ने बिट्टू को दोबारा टिकट नहीं दिया, लेकिन तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाया गया था और वह वहां से निर्विरोध निर्वाचित हुए। राजस्थान से भाजपा ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाया था।

इसलिए तरुण चुघ को राजनीतिक रूप से पंजाब से एक अन्य भाजपा चेहरा माना जा सकता है, लेकिन वह सीधे तौर पर राजस्थान की बिट्टू वाली सीट के उत्तराधिकारी नहीं हैं।

पंजाब चुनाव में उतरने की अटकलें

बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। वह कांग्रेस के टिकट पर तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं—पहली बार आनंदपुर साहिब और इसके बाद दो बार लुधियाना से। मार्च 2024 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी।

उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा उन्हें वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका दे सकती है और वह स्वयं भी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि भाजपा या बिट्टू की ओर से अभी किसी सीट अथवा चुनावी भूमिका की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

इस्तीफे के बाद बिट्टू ने जताया आभार

इस्तीफे के बाद बिट्टू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश और विशेष रूप से पंजाब की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सार्वजनिक सेवा की यात्रा जारी रहेगी।

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