Friday, 24 July 2026

जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल पर मुकदमा चलाने की तैयारी, ACB ने मांगी अभियोजन स्वीकृति


जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल पर मुकदमा चलाने की तैयारी, ACB ने मांगी अभियोजन स्वीकृति

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जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उनके विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अभियोजन स्वीकृति मांगी है। सूत्रों के अनुसार, एसीबी ने जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और अग्रवाल की कथित भूमिका से संबंधित विस्तृत फाइल कार्मिक विभाग को भेज दी है।

अब कार्मिक विभाग एसीबी की रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करेगा। चूंकि सुबोध अग्रवाल भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं, इसलिए अभियोजन स्वीकृति के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सक्षम सरकारी स्तर पर किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि फाइल मुख्यमंत्री स्तर तक भेजी जा सकती है।

मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ेगी न्यायिक प्रक्रिया

अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद एसीबी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत न्यायिक कार्यवाही को आगे बढ़ा सकेगी। मंजूरी के दौरान यह परीक्षण किया जाएगा कि जांच एजेंसी की ओर से प्रस्तुत सामग्री प्रथमदृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त है या नहीं।

एसीबी ने अप्रैल में जारी आधिकारिक प्रेस नोट में भी कहा था कि जल जीवन मिशन प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के लिए संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

हालांकि अभियोजन स्वीकृति का अर्थ किसी आरोपी का दोषी साबित होना नहीं है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और न्यायिक सुनवाई के आधार पर ही होगी।

दिल्ली से गिरफ्तार किए गए थे सुबोध अग्रवाल

राजस्थान कैडर के वर्ष 1988 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को एसीबी ने 9 अप्रैल 2026 को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इससे पहले जयपुर की अदालत ने उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और एसीबी की कई टीमें उनकी तलाश कर रही थीं।

सुबोध अग्रवाल जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव रह चुके हैं। एसीबी का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान जल जीवन मिशन के बड़े टेंडरों की शर्तों और स्वीकृति प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं।

फर्जी प्रमाण-पत्र से टेंडर लेने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, दो निजी फर्मों ने कथित रूप से फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्रों और दस्तावेजों के आधार पर लगभग 960 से 979 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से इन दस्तावेजों को स्वीकार करते हुए निविदाएं प्रदान की गईं।

एसीबी ने यह भी आरोप लगाया कि 50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में साइट विजिट सर्टिफिकेट जैसी शर्त जोड़ने से निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदारों की पहचान पहले ही सामने आ गई। इससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और कई टेंडर अनुमानित लागत से 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक दरों पर स्वीकृत हुए। जांच में ऐसी परियोजनाओं का कुल मूल्य करीब 20 हजार करोड़ रुपये बताया गया है।

करीब 17,500 पन्नों की चार्जशीट पेश

एसीबी ने जून 2026 में सुबोध अग्रवाल के खिलाफ जयपुर की विशेष अदालत में करीब 17,500 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। इसमें टेंडर प्रक्रिया, कथित फर्जी दस्तावेजों, अधिकारियों की भूमिका और निजी फर्मों को लाभ पहुंचाने से संबंधित साक्ष्य शामिल किए गए।

अब अभियोजन स्वीकृति से संबंधित फाइल पर राज्य सरकार के निर्णय का इंतजार है। मंजूरी मिलने पर विशेष अदालत में आरोप निर्धारण और मुकदमे की आगामी प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सकता है।

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