



भीलवाड़ा। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव और ऑपरेशन के बाद महिलाओं की मौत के मामलों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का भीलवाड़ा जिला अस्पताल दौरा विवादों में आ गया। अस्पताल पहुंचने पर पुलिसकर्मियों की ओर से मंत्री को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भीलवाड़ा जिला अस्पताल में हाल के दिनों में प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने से पांच महिलाओं की मौत के मामले सामने आए हैं। इन्हीं घटनाओं के बाद स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने और अधिकारियों से जानकारी लेने पहुंचे थे।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के अस्पताल पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन की ओर से पुलिस की टुकड़ी तैनात की गई और उन्हें औपचारिक सलामी दी गई। इस दौरान अस्पताल में मृत महिलाओं के परिजन और अन्य मरीजों के परिवार भी मौजूद थे।
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि जिस अस्पताल में हाल ही में कई महिलाओं की मौत हुई हो और परिवार शोक में हों, वहां स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के स्वागत के लिए औपचारिक प्रोटोकॉल का प्रदर्शन कितना उचित था।
कुछ लोगों का कहना है कि ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में मंत्री और प्रशासन को स्वागत संबंधी औपचारिकताओं से बचते हुए पीड़ित परिवारों, उपचार व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था।
भीलवाड़ा जिला अस्पताल में कुछ दिनों के भीतर पांच महिलाओं की प्रसव या ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने से मौत होने का मामला सामने आया है। घटनाओं के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था, इस्तेमाल की गई दवाओं, ऑपरेशन प्रक्रिया और उपचार में संभावित लापरवाही को लेकर जांच की मांग उठी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दौरे के दौरान अस्पताल के अधिकारियों और डॉक्टरों से घटनाओं की जानकारी ली। हालांकि, मौतों का वास्तविक कारण विस्तृत चिकित्सा एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
दावा किया जा रहा है कि मई 2026 से अब तक राजस्थान के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान अथवा ऑपरेशन के बाद 18 से अधिक महिलाओं की मौत हुई है। ऐसे मामले कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित विभिन्न जिलों से सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन सभी मामलों की संख्या, चिकित्सा कारणों और आपसी संबंध की आधिकारिक रूप से एकीकृत पुष्टि आवश्यक है। अलग-अलग अस्पतालों में मौत के कारण भिन्न भी हो सकते हैं। कुछ मामलों में महिलाओं की प्रसव या ऑपरेशन के बाद हालत तेजी से बिगड़ने, किडनी प्रभावित होने तथा आंखों की रोशनी कम होने जैसी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे लक्षणों के बाद डॉक्टरों, दवाओं की गुणवत्ता और एनेस्थीसिया में इस्तेमाल सामग्री की जांच की मांग की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित मरीजों को कौन-सी दवाएं दी गई थीं और क्या किसी दवा या इंजेक्शन की एक ही खेप का अलग-अलग अस्पतालों में इस्तेमाल हुआ था। प्रारंभिक स्तर पर सरकारी आपूर्ति की कुछ दवाओं अथवा एनेस्थीसिया इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर आशंकाएं व्यक्त की गई हैं। हालांकि, दवाओं को मौतों का कारण मानना जांच रिपोर्ट और प्रयोगशाला परीक्षण के बिना उचित नहीं होगा। आवश्यक है कि इस्तेमाल की गई दवाओं के नमूनों, बैच नंबर, भंडारण व्यवस्था, ऑपरेशन थियेटर प्रोटोकॉल और उपचार रिकॉर्ड की विशेषज्ञ जांच कराई जाए। जांच में दोषपूर्ण दवा या चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मृत महिलाओं के परिजनों और नागरिक संगठनों की ओर से घटनाओं की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की मांग की जा रही है। साथ ही प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, एनेस्थीसिया प्रक्रिया, जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का विशेष ऑडिट कराने की आवश्यकता भी बताई जा रही है।कई जिलों से सामने आए मौत के मामले
किडनी प्रभावित होने और आंखों की रोशनी जाने की शिकायतें
दवाओं की गुणवत्ता को लेकर आशंका, पुष्टि बाकी
पीड़ित परिवारों ने निष्पक्ष जांच की मांग की