



जयपुर। राजस्थान सरकार ने कम नामांकन वाले 346 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को भी प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शिक्षा ग्रुप-1 विभाग के शासन उप सचिव आलोक जैन ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की मंजूरी के बाद इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को पत्र भेजा है।
विभाग ने बताया कि इन विद्यालयों में विद्यार्थियों का नामांकन अत्यंत कम है। ऐसे में संबंधित विद्यालयों को हिंदी माध्यम में संचालित करने अथवा हिंदी माध्यम की कक्षाएं शुरू करने के संबंध में नियमानुसार प्रस्ताव और विभागीय टिप्पणी शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के साथ शिक्षा विभाग ने प्रस्तावित बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेश में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से सात कार्य दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
रिपोर्ट में संबंधित विद्यालय में हिंदी माध्यम शुरू करने का औचित्य, अंग्रेजी माध्यम में वर्तमान नामांकन, क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकता और अभिभावकों की मांग का आकलन शामिल करना होगा। जिलों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर विभाग अंतिम निर्णय करेगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में अभिभावक अब भी हिंदी माध्यम को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे क्षेत्रों में केवल अंग्रेजी माध्यम से संचालित महात्मा गांधी विद्यालयों में प्रवेश अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रहे हैं।
विभाग को उम्मीद है कि कम नामांकन वाले विद्यालयों में हिंदी माध्यम का विकल्प उपलब्ध कराने से स्थानीय विद्यार्थियों को प्रवेश का अवसर मिलेगा और विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ सकेगी। हालांकि, सभी 346 विद्यालयों का स्वरूप तत्काल बदलने का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के स्थानांतरण किए गए हैं। विद्यालयों में माध्यम परिवर्तन अथवा हिंदी माध्यम की कक्षाएं शुरू होने की स्थिति में विषयवार शिक्षकों की आवश्यकता, पदस्थापन और स्टाफ के पुनर्गठन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
विभाग जिलों से प्राप्त नामांकन आंकड़ों, स्थानीय परिस्थितियों और विद्यार्थियों के हितों की समीक्षा करने के बाद शिक्षक व्यवस्था से संबंधित निर्णय करेगा।
शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने सरकार के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के लिए अलग शिक्षक कैडर बनाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को महंगे निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की फीस से राहत मिली है। कम नामांकन वाले विद्यालयों को बंद करने या उनका स्वरूप बदलने से पहले सरकार को अंग्रेजी माध्यम के योग्य शिक्षकों की सीधी भर्ती करनी चाहिए।
सलावद ने सुझाव दिया कि अंग्रेजी माध्यम के लिए अलग कैडर बनाकर पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यालयों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके बाद भी नामांकन नहीं बढ़ता है तो संबंधित विद्यालयों के बारे में पुनर्विचार किया जा सकता है।
उनका कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और पर्याप्त संसाधन मिलने से अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ नामांकन भी बढ़ सकता है।
अब जिला शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन विद्यालयों में हिंदी माध्यम की वास्तविक आवश्यकता है और किन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम को बेहतर संसाधनों के साथ जारी रखा जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय केवल कम नामांकन के आधार पर नहीं, बल्कि स्थानीय मांग, उपलब्ध स्टाफ, विद्यालय की भौगोलिक स्थिति और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।