Monday, 13 July 2026

शेख हसीना दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर करेंगी आत्मसमर्पण, अवामी लीग नेताओं के साथ वापसी की तैयारी


शेख हसीना दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर करेंगी आत्मसमर्पण, अवामी लीग नेताओं के साथ वापसी की तैयारी

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ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। Reuters को दिए इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी वापस लौटकर आत्मसमर्पण करेंगे।

हसीना ने कहा कि अवामी लीग के लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश लौटने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। रिपोर्ट के अनुसार हसीना ने कहा कि वह स्वेच्छा से लौटेंगी और इसके लिए किसी पर्दे के पीछे की बातचीत की जरूरत नहीं है।

शेख हसीना वर्ष 2024 में बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर हुई कार्रवाई से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई। हसीना इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही हैं।

हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश लौटने को लेकर मौजूदा सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र, चुनाव, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे मुद्दों पर पर्दे के पीछे कोई समझौता नहीं हो सकता।

उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र लिख रही है। हसीना ने कहा कि उन्हें वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वह स्वयं लौटेंगी।

हालांकि, हसीना के इस दावे पर बांग्लादेश सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत की ओर से भी फिलहाल इस नए बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इससे पहले भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

शेख हसीना की संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध, नेताओं पर दर्ज मामलों और आगामी चुनावी माहौल के बीच उनकी वापसी से देश में राजनीतिक हलचल और बढ़ने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हसीना और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता एक साथ लौटकर आत्मसमर्पण करते हैं, तो इसका असर बांग्लादेश की अदालतों, चुनावी राजनीति, विपक्षी एकजुटता और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है।

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