



सरकार सितंबर से नवंबर के बीच चुनाव कराने का पक्ष रख सकती है, OBC आरक्षण रिपोर्ट में निकायों को प्राथमिकता मिलने की संभावना
जयपुर। राजस्थान में इस बार स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों का क्रम बदल सकता है। सरकारी स्तर पर ऐसी तैयारी चल रही है कि पहले नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चुनाव कराए जाएं और इसके बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव हों। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश में वर्षों से चली आ रही चुनावी परंपरा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक आमतौर पर पंचायत चुनाव पहले और उसके बाद नगरीय निकाय चुनाव होते रहे हैं।
जानकारी के अनुसार चुनावी रणनीति, प्रशासनिक तैयारियों और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले निकाय चुनाव कराने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। नगरीय निकायों के परिसीमन, वार्डों की तैयारियों और राजनीतिक फीडबैक को देखते हुए यह रणनीति बनाई जा रही है।
सरकारी स्तर पर माना जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों और नई घोषणाओं का राजनीतिक लाभ पहले लिया जा सकता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव से पहले कुछ योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों को जमीन पर उतारने की तैयारी भी की जा रही है।
निकायों की जीत से पंचायत चुनाव में माहौल बनाने की रणनीति
प्रदेश की मतदाता सूचियों में 1.10 करोड़ से अधिक मतदाता नगरीय निकाय क्षेत्रों से जुड़े हैं, जबकि पंचायतीराज संस्थाओं में करीब 4.02 करोड़ मतदाता हैं। ऐसे में राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि यदि पहले निकाय चुनाव होते हैं और सत्ता पक्ष बेहतर प्रदर्शन करता है, तो इसका संदेश ग्रामीण क्षेत्रों तक जाएगा।
सत्ता और संगठन से जुड़े रणनीतिकारों का आकलन है कि पार्टी का आधार शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूत रहता है। ऐसे में निकाय चुनाव में जीत मिलने पर पंचायत चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और गांवों में भी राजनीतिक माहौल बनाने में मदद मिल सकती है।
OBC आरक्षण रिपोर्ट में निकायों को प्राथमिकता संभव
प्रदेश में OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग राज्य सरकार को आरक्षण संबंधी रिपोर्ट सौंपेगा। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में पहले निकाय चुनावों से जुड़े आरक्षण को प्राथमिकता दी जा सकती है। सरकार आयोग से पहले नगरीय निकायों पर रिपोर्ट मांग सकती है।
आयोग 14 अगस्त के आसपास सरकार को रिपोर्ट सौंप सकता है। फिलहाल आयोग OBC परिवारों का सर्वे करा रहा है, जिसके 23 जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद आरक्षण प्रक्रिया और चुनावी कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
कोर्ट में सितंबर से नवंबर तक चुनाव कराने का पक्ष संभव
सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग अदालत में यह पक्ष रख सकते हैं कि चुनाव सितंबर से नवंबर के बीच कराए जाएं। हाईकोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय-सीमा तय की थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे में सरकार अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग सरकार को बता चुका है कि निकाय चुनाव कराने में करीब 40 दिन का समय लगेगा। वहीं पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने में करीब 50 दिन लग सकते हैं। ऐसे में चुनावों का क्रम और समय तय करना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गया है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। मामला कोर्ट से जुड़ा है। क्या होगा और क्या नहीं, इस पर अभी कुछ कहना उचित नहीं है।
प्रदेश में 385 नगरीय निकाय, 14 हजार से अधिक पंचायतें
प्रदेश में कुल 385 नगरीय निकाय हैं। इनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर और भरतपुर जैसे बड़े नगर निगम शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें हैं।
इसके अलावा 10 जिला परिषदों और 108 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर तक समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में सरकार चुनावी क्रम को इस तरह व्यवस्थित करना चाहती है कि निकाय और पंचायत दोनों चुनावों की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।
प्रशासनिक स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि पहले लगभग 40 दिन में निकाय चुनाव और उसके बाद करीब 50 दिन में पंचायत चुनाव कराकर पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत, राज्य निर्वाचन आयोग, आरक्षण रिपोर्ट और सरकार की तैयारियों पर निर्भर करेगा।