Thursday, 09 July 2026

राजस्थान में यूसीसी लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, 10 और 11 जुलाई को जयपुर में जनसुनवाई


राजस्थान में यूसीसी लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, 10 और 11 जुलाई को जयपुर में जनसुनवाई

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जयपुर। प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अगला कदम बढ़ा दिया है। कानून के मसौदे को व्यावहारिक, संतुलित और सर्वसमावेशी बनाने के लिए 10 और 11 जुलाई 2026 को जयपुर के कलेक्टर सभागार में दो दिवसीय संभाग स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।

सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति आमजन, प्रबुद्धजनों, विभिन्न संगठनों और समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव लेगी। संभागीय आयुक्त वी. सरवण कुमार ने जिला प्रशासन को जनसुनवाई के सफल आयोजन और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

दो दिन चलेगी जनसुनवाई
10 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, नगर निकाय अध्यक्षों, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे।

इसी दिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक जयपुर संभाग के विभिन्न जिलों से आने वाले आम नागरिकों के लिए जनसुनवाई होगी। इसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह करेंगे।

11 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक जयपुर जिले के शेष नागरिकों के लिए जनसुनवाई रखी गई है। इस दौरान समिति सदस्य डॉ. शुचि चौहान की मौजूदगी में आमजन से सुझाव लिए जाएंगे।

इन विषयों को UCC के दायरे में रखने पर विचार
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के दायरे में विवाह, विवाह विच्छेद यानी तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। समिति इन विषयों पर अलग-अलग वर्गों की राय लेकर मसौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

सरकार ने सुझावों के लिए ucc.rajasthan.gov.in पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल पर नागरिक सवालों के जवाब देकर अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं और संबंधित दस्तावेज भी अपलोड कर सकते हैं।

इन सवालों पर मांगी जा रही राय
जनसुनवाई और पोर्टल के माध्यम से नागरिकों से यह राय मांगी जा रही है कि क्या वे संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता के प्रावधान से परिचित हैं और क्या वे राजस्थान में यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं।

इसके अलावा यह भी पूछा जा रहा है कि क्या यूसीसी को संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू किया जा सकता है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों को यूसीसी में शामिल करने को लेकर भी आमजन से सुझाव मांगे जा रहे हैं।

समिति यह भी जानना चाहती है कि क्या सभी समुदायों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम होने चाहिए, क्या तलाक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए और क्या भरण-पोषण के लिए एक समान कानून बनाया जाना चाहिए।

महिलाओं और पुरुषों को समान संपत्ति अधिकार देने, लिव-इन संबंधों के अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन संबंधों से जुड़ी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बहुविवाह के प्रभाव और सामाजिक कुरीतियों तथा लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने में यूसीसी की भूमिका पर भी राय ली जाएगी।

सरकार का उद्देश्य विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों के आधार पर ऐसा मसौदा तैयार करना है, जो सामाजिक संतुलन, संवैधानिक मूल्यों और समान अधिकारों की भावना को ध्यान में रखकर बनाया जा सके।

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