



राज्यपाल एवं कुलाधिपति के आदेश को कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या दुर्भावनापूर्ण और मनमाना माना
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे की ओर से जारी बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है। इससे बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटाए गए प्रो. देव स्वरूप को बड़ी अंतरिम राहत मिली है।
जस्टिस रेखा बोराणा की कोर्ट ने प्रो. देव स्वरूप को कुलपति पद से हटाने के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि प्रथम दृष्ट्या बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और मनमाना प्रतीत होता है। अदालत ने इस आधार पर आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
मामला राजस्थान विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती से जुड़ा है। आरोप है कि प्रो. देव स्वरूप के राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति रहने के दौरान वर्ष 2011-12 और 2013-14 में 294 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं।
शिकायतों के बाद हुई जांच में भर्ती प्रक्रिया के दौरान इंटरव्यू अंकों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। आरोपों के अनुसार, कुछ योग्य अभ्यर्थियों को 50 में से कम अंक दिए गए, जबकि कथित रूप से पसंदीदा अभ्यर्थियों को अत्यधिक अंक दिए गए। इसी आधार पर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।
जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने 27 मई 2026 को प्रो. देव स्वरूप को बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटा दिया था। प्रो. देव स्वरूप बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय के पहले कुलपति थे और विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के रूप में भी कार्य कर रहे थे।
बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए प्रो. देव स्वरूप की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या आदेश को मनमाना और दुर्भावनापूर्ण मानते हुए उस पर रोक लगा दी। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई और पक्षकारों की दलीलों के बाद ही होगा।
हाईकोर्ट की इस अंतरिम राहत के बाद अब सबकी नजर मामले की अगली सुनवाई और राज्य सरकार तथा राजभवन की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर रहेगी।