Thursday, 02 July 2026

29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के ब्रेकआउट सेशन में विशेषज्ञों ने एआई, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना को बताया समय की जरूरत


29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के ब्रेकआउट सेशन में विशेषज्ञों ने एआई, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना को बताया समय की जरूरत

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर, 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तहत बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में द्वितीय ब्रेकआउट सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का विषय एआई एंड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर सिक्योर पब्लिक सर्विसेज रहा। सत्र में विशेषज्ञों ने सुरक्षित डिजिटल सेवाओं, विश्वसनीय एआई, साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

सत्र की अध्यक्षता एमएनआईटी जयपुर के निदेशक प्रो. एन.पी. पाधी ने की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से आवश्यक सेवाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निर्भर होती जा रही है। भविष्य में एआई के प्रभावी और सुरक्षित उपयोग के बिना सामान्य जीवन की कल्पना करना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और दक्ष एआई टूल्स के अभाव में डिजिटल जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

प्रो. पाधी ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई के बढ़ते प्रभाव के बावजूद निकट भविष्य में मानव बुद्धिमत्ता का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक को मानवीय विवेक, जवाबदेही और नैतिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर ही जनहितकारी डिजिटल सेवाओं को प्रभावी बनाया जा सकता है।

सत्र के पैनलिस्ट प्रो. वीरेंद्र सिंह, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई ने सुपर स्मार्ट वेब 5.0 के दौर में साइबर सुरक्षा की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने साइबर सुरक्षा उल्लंघन के विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

प्रो. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि एआई के प्रभावी उपयोग के बिना पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल शासन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक को कितना सुरक्षित, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाया जाता है।

सत्र में पैनलिस्ट रवि गुप्ता, आईपीएस सेवानिवृत्त, कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं महानिदेशक, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस, हैदराबाद ने कहा कि एआई ने सर्विस डिलीवरी को प्रोएक्टिव बनाया है। अब सरकारें नागरिकों की जरूरतों को पहले से समझकर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एआई के बिना ई-गवर्नेंस को विश्वसनीय नहीं बनाया जा सकता।

रवि गुप्ता ने डेटा गोपनीयता, सुरक्षित पहचान प्रणाली और एक्सेस मैनेजमेंट की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि डेटा एआई का ईंधन है, इसलिए इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षित डेटा एन्क्रिप्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डेटा संरक्षण सरकार नियंत्रित डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पैनलिस्ट नितिन उमेश, सीआईएसओ, प्रामेरिका, गुरुग्राम ने कहा कि एआई अब स्थायी वास्तविकता बन चुका है। इसके बढ़ते उपयोग के साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं, जिनका सामना करने के लिए प्रणालियों को निरंतर विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि एआई से जुड़े जोखिमों का व्यवस्थित आकलन कर सुरक्षित एआई इकोसिस्टम विकसित करना समय की मांग है।

डॉ. रमेश बाबू बट्टुला, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, एमएनआईटी जयपुर ने कहा कि हाल के वर्षों में एआई के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि एआई के व्यापक विस्तार के लिए इसकी सेवाओं का सुरक्षित, विश्वसनीय और उत्तरदायी होना आवश्यक है। बदलते साइबर जोखिमों के अनुरूप सुरक्षा तंत्र को लगातार अद्यतन करते रहना होगा।

सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने एआई, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, डिजिटल अवसंरचना और सुरक्षित सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से प्रश्न किए। प्रश्नोत्तर सत्र में विशेषज्ञों ने डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी, प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

समापन अवसर पर डीओआईटीसी, राजस्थान के तकनीकी निदेशक अखिलेश मित्तल ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट किए। सत्र में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विकसित भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने के लिए विश्वसनीय एआई और मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

Previous
Next

Related Posts