Saturday, 29 August 2026

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की हत्या: गमछा पंखे पर लटका मिला, सुसाइड का रूप देने की आशंका


अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की हत्या: गमछा पंखे पर लटका मिला, सुसाइड का रूप देने की आशंका

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अजमेर। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में नए तथ्य सामने आए हैं। जिस गमछे से जगन गुर्जर का गला घोंटे जाने की बात सामने आई है, वह बाद में सेल के पंखे पर लटका मिला। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि हत्या के बाद आरोपी विष्णु जाट ने घटना को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया हो, लेकिन जगन गुर्जर के भारी-भरकम शरीर के कारण वह ऐसा करने में सफल नहीं हो सका।

जेल प्रशासन के अनुसार, सेल में लगा पंखा करीब 13 फीट ऊंचाई पर है। ऐसे में किसी व्यक्ति को उस पर लटकाना तो दूर, किसी कैदी द्वारा स्वयं भी वहां फंदा लगाना अत्यंत कठिन माना जा रहा है। गमछे के पंखे पर मिलने से यह संभावना जताई जा रही है कि आरोपी ने हत्या के बाद सुसाइड जैसा दृश्य बनाने की कोशिश की हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

जेल प्रशासन की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जगन गुर्जर और आरोपी विष्णु जाट के बीच पहले से कोई बड़ा विवाद या योजना सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच किसी आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ और इसी आवेश में आरोपी ने गमछे से जगन का गला घोंट दिया। फिलहाल पुलिस और जेल प्रशासन घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।

मामले में सीसीटीवी निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जेल में कुल 315 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिनमें से करीब 280 कैमरे चालू बताए जा रहे हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि जगन गुर्जर के ब्लॉक का कैमरा चालू था और उसमें दोनों कैदियों की गतिविधियां देखी गई हैं। वहीं, जगन की सेल में लगे कैमरे पर टूथपेस्ट जैसा सफेद पदार्थ लगा मिला। हालांकि कैमरा चालू था, लेकिन लेंस पर पदार्थ लगे होने के कारण सेल के भीतर की गतिविधियों की स्पष्टता प्रभावित होने की आशंका है।

ब्लॉक के फुटेज से यह बात सामने आई है कि घटना के दौरान जगन गुर्जर की सेल में कोई अन्य व्यक्ति नहीं गया। इससे जांच का केंद्र आरोपी विष्णु जाट और सेल के भीतर हुई गतिविधियों पर टिक गया है। हाई सिक्योरिटी जेल जैसी संवेदनशील जगह में कैमरे पर पदार्थ लगाया जाना सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

छह सदस्यीय मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमॉर्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में जगन गुर्जर की मौत गले और गर्दन पर अत्यधिक दबाव पड़ने से होना सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिक दबाव के कारण गर्दन की महत्वपूर्ण हड्डी यानी हायोड बोन टूट गई थी। गर्दन के मध्य हिस्से में अंदरूनी रक्तस्राव भी पाया गया है।

प्रारंभिक मेडिकल निष्कर्षों में सांस नली और भोजन नली के आसपास गंभीर चोट के संकेत मिले हैं। गर्दन की हड्डी और आसपास के ऊतकों को भी नुकसान पहुंचा था। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, गला घोंटे जाने के बाद लगभग तीन मिनट के भीतर जगन गुर्जर की सांसें थम गईं।

हालांकि मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की मौत कितनी देर में होगी, यह चोट की प्रकृति, दबाव की तीव्रता और व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। इस मामले में अंतिम राय एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट मिलने के बाद ही दी जाएगी। जांच एजेंसियों ने जगन गुर्जर के नाखूनों के नमूने सुरक्षित कर एफएसएल जांच के लिए भेजे हैं।

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हुई इस घटना ने जेल प्रशासन, निगरानी व्यवस्था और कैदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद घटना के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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