



जयपुर। राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामले के बाद ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बताया जा रहा है कि राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के पीछे इसी इंजेक्शन के उपयोग को संभावित कारणों में माना जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी भारत सरकार से रिपोर्ट मांगी है। WHO ने यह जानकारी मांगी है कि इस तरह का मामला केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित है या देश में अन्य जगहों पर भी ऐसी स्थिति सामने आई है। इसके साथ ही संगठन ने इस पूरे मामले के कारणों और जांच की स्थिति को लेकर भी जानकारी मांगी है।
राजस्थान के कोटा में प्रसूताओं की मौत की घटना के बाद राजस्थान ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों, इंजेक्शन और सर्जिकल आइटम की जांच की थी। जांच के दौरान मैसर्स जैक्सन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, अमृतसर, पंजाब के इंजेक्शन TOCIN यानी ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 5 एमएल का सैंपल जांच में फेल पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन कंपोनेंट पर्याप्त मात्रा में नहीं मिला। यह तथ्य सामने आने के बाद दवा की गुणवत्ता और इसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद्द कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, कोटा में प्रसूताओं को इसी कंपनी के 1 एमएल मात्रा वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए गए थे। इसके बाद 5 प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया। घटना के बाद चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग हरकत में आए और अस्पताल में उपयोग की गई दवाओं तथा इंजेक्शनों की जांच शुरू की गई।
जांच रिपोर्ट में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल फेल होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। अब यह जांच की जा रही है कि इंजेक्शन की गुणवत्ता में कमी किस स्तर पर हुई और क्या इसी कारण प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी थी।
इस मामले में WHO की ओर से भारत सरकार से रिपोर्ट मांगना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। WHO ने पूछा है कि क्या यह मामला केवल राजस्थान के कोटा क्षेत्र तक सीमित है या अन्य राज्यों और क्षेत्रों में भी इसी तरह के इंजेक्शन का उपयोग हुआ है। इसके अलावा WHO ने यह भी जानकारी मांगी है कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राज्य सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। दवा निर्माण, सप्लाई चैन, अस्पताल स्तर पर उपयोग और गुणवत्ता जांच से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग आमतौर पर प्रसव से जुड़े चिकित्सकीय मामलों में किया जाता है। ऐसे में इंजेक्शन की गुणवत्ता में कमी मिलना बेहद गंभीर माना जा रहा है। यदि दवा में निर्धारित मात्रा में सक्रिय तत्व मौजूद नहीं हो, तो उपचार प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और मरीजों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
कंपनी का लाइसेंस रद्द होने के बाद अब यह भी देखा जाएगा कि इस बैच की दवा किन-किन स्थानों पर सप्लाई की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ऐसी दवाओं को चिन्हित कर बाजार और अस्पतालों से हटाने की कार्रवाई भी कर सकता है।
कोटा में प्रसूताओं की मौत के बाद परिजनों और आमजन में नाराजगी है। अब जांच रिपोर्ट और लाइसेंस रद्द होने के बाद इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग और तेज हो सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि गुणवत्ता जांच में फेल इंजेक्शन अस्पतालों तक कैसे पहुंचे और इन्हें उपयोग से पहले क्यों नहीं रोका गया।
फिलहाल केंद्र और राज्य स्तर पर मामले की जांच जारी है। संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ दवा आपूर्ति व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र की भी समीक्षा की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूताओं की मौत में इंजेक्शन की गुणवत्ता की भूमिका कितनी थी।