Saturday, 27 June 2026

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को NHB से 99.60 लाख की सब्सिडी पर विवाद, कांग्रेस ने उठाए हितों के टकराव के सवाल


केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को NHB से 99.60 लाख की सब्सिडी पर विवाद, कांग्रेस ने उठाए हितों के टकराव के सवाल

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जयपुर। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड यानी NHB से अपने फार्म पर 99.60 लाख रुपए की सब्सिडी मिलने का मामला सामने आने के बाद राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चौधरी को परबतसर के पीह गांव स्थित अपने फार्म पर पॉली हाउस में खीरे की खेती के लिए यह सब्सिडी मंजूर हुई थी। कांग्रेस ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए केंद्र सरकार और मंत्री पर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार, नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की योजना के तहत चौधरी के फार्म पर 16,592 वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस में खीरे की खेती के लिए सब्सिडी मंजूर की गई। देशभर में किसानों के ऐसे 457 प्रोजेक्ट मंजूर हुए, जिनमें चौधरी का प्रोजेक्ट भी शामिल था। विवाद इसलिए बढ़ा है, क्योंकि भागीरथ चौधरी केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री होने के साथ बोर्ड के उपाध्यक्ष भी हैं।

चौधरी बोले- किसान के नाते ली सब्सिडी, कुछ छिपाया नहीं

विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी छिपाकर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि हजारों किसान पॉली हाउस और फार्म पॉन्ड पर सब्सिडी लेते हैं, उसी तरह उन्होंने भी किसान के नाते योजना का लाभ लिया है।

चौधरी ने कहा कि वे अपने फार्म पर किसानों को लेकर जाते हैं और वहां उन्नत तथा प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग देते हैं। उनके अनुसार, कलेक्टर और एसडीएम सहित कई अधिकारी भी उनके फार्म का विजिट कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे बचपन से खेती करते आए हैं और योजना की गाइडलाइन के आधार पर ही उन्होंने पॉली हाउस लगाया था।

बोले- सब्सिडी वाला विभाग मेरे पास नहीं

भागीरथ चौधरी ने यह भी कहा कि कृषि मंत्रालय में दो राज्य मंत्री हैं और पॉली हाउस तथा कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी सब्सिडी वाला विभाग दूसरे राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर के पास है। उन्होंने कहा कि यह विभाग उनके पास नहीं है, इसलिए हितों के टकराव का आरोप सही नहीं है।

चौधरी ने बताया कि जिस जमीन पर उन्होंने पॉली हाउस लगाया है, वहां पानी की कमी है। इसके लिए उन्होंने 2 करोड़ लीटर क्षमता के चार फार्म पॉन्ड बनाए हैं और पॉली हाउस की छत से बारिश का पानी एकत्र किया जाता है। इसी पानी से वे सालभर उन्नत खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि पॉली हाउस में वे खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलें लेते हैं।

NHB योजना में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड बागवानी, फसलों और सब्जियों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चुनिंदा प्रगतिशील किसानों को सब्सिडी देता है। योजना के तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और गुलाब सहित फूलों की कई वैरायटी की उन्नत खेती के लिए सहायता दी जाती है।

जानकारी के अनुसार, इस योजना में हर परिवार को प्रोजेक्ट लागत की 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है। इसी योजना के तहत भागीरथ चौधरी के प्रोजेक्ट को 99.60 लाख रुपए की सब्सिडी मंजूर होने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि क्या मंत्री रहते हुए अपने ही मंत्रालय से संबंधित बोर्ड की योजना का लाभ लेना उचित है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार और मंत्री पर बोला हमला

इस खुलासे के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने केंद्र सरकार और भागीरथ चौधरी पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के नए मॉडल और हितों के टकराव का बड़ा उदाहरण सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से अपने खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपए की सब्सिडी मंजूर करवा लें, तो इसे क्या कहा जाएगा।

गहलोत ने आरोप लगाया कि एक तरफ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

डोटासरा बोले- किसानों का हक मारा गया

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मामले में तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में लूट मची हुई है और किसान दर-दर भटक रहे हैं, जबकि मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से 1 करोड़ रुपए की सब्सिडी हासिल कर रहे हैं।

डोटासरा ने कहा कि यदि यह लाभ किसी योग्य और जरूरतमंद किसान को मिलता, तो उसका जीवन बदल सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह किसानों के हक को मारने के साथ-साथ हितों के टकराव का भी गंभीर मामला है, क्योंकि कृषि राज्य मंत्री बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं।

पायलट ने की निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जब केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री स्वयं NHB बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या यह हितों के टकराव से जुड़ा मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है।

पायलट ने मांग की कि इस मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि देश की जनता के सामने सच्चाई आ सके। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसानों के लिए बनी योजनाओं का लाभ प्रभावशाली लोगों के बजाय पात्र और जरूरतमंद किसानों तक पहुंचना चाहिए।

सियासी विवाद और बढ़ने के आसार

भागीरथ चौधरी की सफाई के बावजूद यह मामला राजनीतिक रूप से गर्मा गया है। कांग्रेस इसे किसानों के हक और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं चौधरी का कहना है कि उन्होंने किसान के रूप में योजना का लाभ लिया है और इसमें कुछ भी नियम विरुद्ध नहीं है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार या संबंधित एजेंसियां इस मामले में कोई जांच या स्पष्टीकरण जारी करती हैं या नहीं। फिलहाल राजस्थान में यह मुद्दा भाजपा और कांग्रेस के बीच नए राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है।

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