Saturday, 27 June 2026

राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण पर पेच, आयोग बोला- सरकार से मांगी सूचना नहीं मिली


राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण पर पेच, आयोग बोला- सरकार से मांगी सूचना नहीं मिली

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण निर्धारण को लेकर मामला एक बार फिर उलझता नजर आ रहा है। पंचायत-निकायों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए गठित राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग का कहना है कि राज्य सरकार से आरक्षण से जुड़ी जो जरूरी सूचनाएं मांगी गई थीं, वे अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ऐसे में आयोग फिलहाल अपनी रिपोर्ट सौंपने की स्थिति में नहीं है।

आयोग के अधिकारियों का कहना है कि बिना सटीक आंकड़ों के ओबीसी आरक्षण पर ठोस रिपोर्ट तैयार करना संभव नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट ने आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने के लिए बाध्य नहीं किया है। आयोग का कार्यकाल 30 दिसंबर तक है, ऐसे में आयोग का कहना है कि वह आवश्यक आंकड़े मिलने के बाद ही रिपोर्ट तैयार कर सकेगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को लिखा पत्र

राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 जून को राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि चुनाव की तिथि नजदीक है, इसलिए आरक्षण से संबंधित डेटा जल्द उपलब्ध कराया जाए। हाईकोर्ट के आदेशों के पालन के तहत राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने होंगे। ऐसे में आरक्षण निर्धारण में देरी से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

जानकारों का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग एक बार फिर उसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां बिना आरक्षण निर्धारण के चुनाव कराना संभव नहीं होगा। पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पंचायतवार जनसंख्या और पिछड़े वर्गों के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं।

फरवरी में आयोग ने मांगे थे आंकड़े

राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने 24 फरवरी 2026 को मुख्य सचिव के नाम पत्र लिखा था। इस पत्र में पंचायत स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण निर्धारण के लिए जरूरी सूचनाएं मांगी गई थीं। करीब चार महीने बीतने के बाद भी आयोग को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

आयोग ने सभी 14,403 पंचायतों के लिए पंचायतवार कुल जनसंख्या और पिछड़े वर्ग की जनसंख्या के आंकड़े मांगे थे। इसके अलावा एससी-एसटी आरक्षण से जुड़ी आवश्यक जानकारी और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के सटीक आंकड़े भी मांगे गए थे। आयोग का कहना है कि इन आंकड़ों के बिना आरक्षण की रिपोर्ट तैयार करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

आयोग सचिव बोले- आंकड़े मिलें तो काम आसान होगा

राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग के सचिव सलाहकार अशोक जैन ने कहा कि यदि सरकार आरक्षण से जुड़ी सूचनाएं उपलब्ध करा दे, तो आयोग के लिए काम आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग को अभी तक सटीक आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं, ऐसे में रिपोर्ट कैसे सौंपी जा सकती है।

आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए तथ्यात्मक और प्रमाणिक डेटा जरूरी है। पंचायत स्तर पर जनसंख्या, ओबीसी आबादी और पूर्व आरक्षण व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ही आगे की सिफारिशें तैयार की जा सकती हैं।

सरकार बोली- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार देना चाहते हैं आरक्षण

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ओबीसी को आरक्षण देना चाहती है। उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट देगा, जिसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इसके बाद कैबिनेट बैठक में विचार कर निर्णय लिया जाएगा।

दिलावर ने कहा कि सरकार विशेषज्ञों से चर्चा कर उचित समय पर निर्णय करेगी। कांग्रेस के इस आरोप पर कि भाजपा चुनाव कराने से बच रही है, मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 17 साल तक चुनाव नहीं कराए और अब भाजपा पर आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार ओबीसी को पूरा आरक्षण देना चाहती है, इसलिए आयोग का गठन किया गया है।

चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर

ओबीसी आरक्षण पर रिपोर्ट और डेटा को लेकर बने गतिरोध का असर पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराए जाने हैं, लेकिन आरक्षण निर्धारण के बिना चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अब राज्य सरकार, ओबीसी आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच समन्वय बेहद अहम हो गया है। यदि सरकार शीघ्र जरूरी आंकड़े उपलब्ध कराती है, तो आयोग रिपोर्ट तैयार कर सकता है और उसके आधार पर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण का मुद्दा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा विषय बन गया है।

Previous
Next

Related Posts