Saturday, 27 June 2026

राजस्थान की 23 रेल परियोजनाओं की लागत दोगुनी से ज्यादा बढ़ी, 88 हजार करोड़ से 1.64 लाख करोड़ पहुंचा बजट


राजस्थान की 23 रेल परियोजनाओं की लागत दोगुनी से ज्यादा बढ़ी, 88 हजार करोड़ से 1.64 लाख करोड़ पहुंचा बजट

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जयपुर। राजस्थान में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़ी रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन देरी के कारण इन परियोजनाओं की लागत में भारी बढ़ोतरी हो गई है। केंद्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग डिवीजन की ओर से 25 जून को जारी रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में चल रही 23 रेल परियोजनाओं की मूल लागत 88,286.45 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 1,64,998 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

रिपोर्ट के अनुसार इन परियोजनाओं पर अब तक 1,53,744.72 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। कई परियोजनाओं में काम आगे बढ़ा है, लेकिन कई योजनाएं अब भी धीमी गति से चल रही हैं। लेटलतीफी के कारण न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ी है, बल्कि रेलवे कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी अपेक्षाएं भी प्रभावित हुई हैं।

प्रदेश में चल रही प्रमुख परियोजनाओं में सवाई माधोपुर बाइपास लाइन का 77 प्रतिशत और आगरा फोर्ट-बांदीकुई डबलिंग परियोजना का 56 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वहीं जयपुर-सवाई माधोपुर रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना में अभी तक केवल 19 प्रतिशत प्रगति हुई है। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त रूप से चल रही कुछ परियोजनाओं की गति भी अपेक्षा से धीमी है।

तरंगा-अंबाजी-आबू रोड रेल लाइन का 37 प्रतिशत काम पूरा

तरंगा हिल-अंबाजी-आबू रोड नई रेल लाइन परियोजना जुलाई 2022 में स्वीकृत हुई थी। 116.65 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,798.16 करोड़ रुपए है। अब तक इस परियोजना का 37 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ है और 2,569.32 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इस परियोजना को जुलाई 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी तरह लूणी-समदड़ी-भीलड़ी डबलिंग परियोजना का 36 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। इस परियोजना की लागत 3,085.59 करोड़ रुपए है और अब तक 835.93 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इस योजना को जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

रामगंजमंडी-भोपाल परियोजना की लागत 2 हजार करोड़ बढ़ी

राजस्थान और मध्यप्रदेश से जुड़ी रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना 22 वर्ष पहले स्वीकृत हुई थी। इसकी मूल लागत 3,032 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर 5,073 करोड़ रुपए हो चुकी है। इसके बावजूद परियोजना का अब तक 82 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है।

इस परियोजना की पूर्णता की समय-सीमा पहले दिसंबर 2025 तय थी, जिसे अब बढ़ाकर दिसंबर 2027 कर दिया गया है। लागत वृद्धि और समयसीमा बढ़ने से यह परियोजना भी देरी से प्रभावित बड़ी रेल योजनाओं में शामिल हो गई है।

कई परियोजनाओं की प्रगति 50 प्रतिशत से कम

रिपोर्ट के अनुसार, कई रेल परियोजनाओं की प्रगति अब भी 50 प्रतिशत से कम है। पोकरण-रामदेवरा नई रेल लाइन परियोजना की स्वीकृत लागत 189.21 करोड़ रुपए है, लेकिन अब तक केवल 55.58 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं और कार्य प्रगति मात्र 1 प्रतिशत है। पुष्कर-मेड़ता सिटी रेल लाइन परियोजना की लागत 799.64 करोड़ रुपए है, जिसमें 211.61 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं और प्रगति 8 प्रतिशत है।

नाथद्वारा-नाथद्वारा टाउन नई लाइन परियोजना में 15 प्रतिशत, सवाई माधोपुर-जयपुर रेल लाइन परियोजना में 19 प्रतिशत और अजमेर-चंदेरिया डबलिंग परियोजना में 22 प्रतिशत कार्य हुआ है। धौलपुर-सरमथुरा गेज परिवर्तन परियोजना की प्रगति 49.7 प्रतिशत बताई गई है।

वहीं देवगढ़ मदारिया-नाथद्वारा गेज परिवर्तन परियोजना का 73 प्रतिशत, सादुलपुर-चूरू डबलिंग का 94 प्रतिशत और आरडीएसओ डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक फेज-2 का 98 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

देरी के कई कारण आए सामने

रेल परियोजनाओं में देरी के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें भूमि अधिग्रहण में विलंब, वन एवं पर्यावरण मंजूरी मिलने में देरी, ठेकेदारों की धीमी कार्य गति, अनुबंध संबंधी समस्याएं और अतिरिक्त बजट की आवश्यकता प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा यूटिलिटी शिफ्टिंग, जैसे बिजली लाइन और पाइपलाइन हटाने या स्थानांतरित करने में देरी भी परियोजनाओं को प्रभावित कर रही है। पुल, सुरंग और पहाड़ी क्षेत्रों में भू-वैज्ञानिक तथा तकनीकी कठिनाइयों के कारण भी कई योजनाओं की गति धीमी हुई है।

डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक 98 प्रतिशत पूरा

आरडीएसओ डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक फेज-2 सबसे अधिक प्रगति वाली परियोजनाओं में शामिल है। इसका 98 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वहीं गुढ़ा साल्ट से ठठाना मिठड़ी तक बन रहे ट्रायल ट्रैक का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है।

इस ट्रायल ट्रैक की मूल लागत 819.48 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 967.06 करोड़ रुपए हो गई है। योजना पर अब तक 405.39 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। रेवाड़ी-काढूवास डबलिंग परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। करीब 352 करोड़ रुपए लागत वाली इस परियोजना पर 325.79 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

कुल मिलाकर, राजस्थान में रेल ढांचे को मजबूत करने वाली परियोजनाएं प्रदेश की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन देरी और लागत वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है। अब चुनौती इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की है, ताकि प्रदेश को बेहतर रेल नेटवर्क, औद्योगिक विकास और यात्री सुविधाओं का लाभ मिल सके।

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