Saturday, 27 June 2026

NCERT की कक्षा 9 की किताब में SIR और इमरजेंसी शामिल, प्रस्तावना हटाने पर शुरू हुई बहस


NCERT की कक्षा 9 की किताब में SIR और इमरजेंसी शामिल, प्रस्तावना हटाने पर शुरू हुई बहस

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नई दिल्ली। NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR और आपातकाल से जुड़े नए हिस्से शामिल किए हैं। किताब में SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने, मतदाताओं का सत्यापन करने और मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करने की प्रक्रिया के रूप में समझाया गया है। इसके जरिए छात्रों को यह बताया जाएगा कि मतदाता सूची की नियमित जांच और संशोधन से चुनावी प्रक्रिया को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जा सकता है।

नई किताब में छात्रों को चुनावी प्रणाली, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया है। इसमें बताया गया है कि यदि मतदाता सूची सही और अद्यतन रहे, तो योग्य मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं और अपात्र नामों को हटाकर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखा जा सकता है।

इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने बड़ी चुनौती बताया

कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ हिस्से में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक में आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों और मौलिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव को समझाने की कोशिश की गई है।

किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों और आम नागरिकों को संगठित किया तथा बिहार और गुजरात में बड़े जन आंदोलनों को दिशा दी। पुस्तक के अनुसार, आपातकाल समाप्त होने के बाद 1977 में आम चुनाव कराए गए और जनता ने मतदान के माध्यम से अपनी राय व्यक्त की। तत्कालीन सत्तारूढ़ सरकार की हार को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रस्तावना और सेक्युलर-सोशलिस्ट शब्दों पर विवाद

नई किताब को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ा है, क्योंकि इसमें संविधान की प्रस्तावना को पहले की तरह शामिल नहीं किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा ‘सोशलिस्ट’ और ‘सेक्युलर’ जैसे शब्दों का भी अलग से उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, किताब में संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नई पुस्तक में संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य जैसे शब्दों की अलग व्याख्या नहीं दी गई है। इसे लेकर शिक्षा और राजनीति से जुड़े हलकों में बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि छात्रों को संविधान की प्रस्तावना और उसके मूल शब्दों की जानकारी मिलनी चाहिए, जबकि पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

42वें संविधान संशोधन का भी संदर्भ

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आपातकाल के दौरान वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए थे। इससे पहले ये शब्द प्रस्तावना में शामिल नहीं थे। हालांकि, ये शब्द आज भी संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा हैं।

नई NCERT पुस्तक में आपातकाल को शामिल किए जाने को लेकर यह तर्क दिया जा रहा है कि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के कठिन दौर और उससे मिली सीख के बारे में जानकारी होनी चाहिए। वहीं, प्रस्तावना और संबंधित संवैधानिक शब्दों के कम उल्लेख को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

छात्रों को चुनाव और लोकतंत्र की प्रक्रिया समझाने पर जोर

NCERT की नई पुस्तक में SIR को शामिल किए जाने से छात्रों को मतदाता सूची, मतदाता सत्यापन और चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता के बारे में जानकारी मिलेगी। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि निष्पक्ष मतदाता सूची, पारदर्शी प्रक्रिया और नागरिक भागीदारी भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कुल मिलाकर, कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में SIR और आपातकाल को शामिल किए जाने से पाठ्यक्रम में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक इतिहास को नया स्थान मिला है। हालांकि, प्रस्तावना और ‘सेक्युलर’ तथा ‘सोशलिस्ट’ जैसे शब्दों के उल्लेख को लेकर उठे सवालों ने इस बदलाव को चर्चा और विवाद का विषय बना दिया है।

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