



अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर में पिछले चार वर्षों से चली आ रही तदर्थ और कार्यवाहक व्यवस्था का दौर अब समाप्त हो गया है। बोर्ड के नवनियुक्त स्थायी अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने सोमवार को अजमेर पहुंचकर पदभार ग्रहण किया। बोर्ड कार्यालय पहुंचने पर अधिकारियों, कर्मचारियों और मंत्रालयिक स्टाफ ने उनका स्वागत किया।
पदभार ग्रहण समारोह के दौरान बोर्ड परिसर में उत्साह का माहौल रहा। कार्यालय परिसर में ढोल-नगाड़े बजाए गए, पुष्प वर्षा की गई और माल्यार्पण कर नए अध्यक्ष का अभिनंदन किया गया। कार्यभार संभालने से पहले हनुमान सिंह राठौड़ ने बोर्ड परिसर स्थित शिव मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर सफलता का आशीर्वाद लिया।
इसके बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त पर ठीक 11:55 बजे हनुमान सिंह राठौड़ ने अपनी सीट पर बैठकर पदभार ग्रहण किया। इस दौरान उनका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। बोर्ड में लंबे समय बाद स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति को प्रशासनिक स्थिरता और शैक्षणिक सुधारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में हनुमान सिंह राठौड़ ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि उनका फोकस केवल परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार करना उनकी प्रमुख प्राथमिकता होगी।
नवनियुक्त अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP के नए मापदंडों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को कम करना और उनकी तार्किक क्षमता, विश्लेषण शक्ति और समझ आधारित अध्ययन को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान बोर्ड की आगामी पाठ्यपुस्तकों को भी नए पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इनमें भारत की राष्ट्रीयता, गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और मूल्य-आधारित शिक्षा को प्रमुखता दी जाएगी। राठौड़ ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की प्रक्रिया है।
हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि नई शिक्षा नीति को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रदेश के शिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे शिक्षक नए परीक्षा पैटर्न, मूल्यांकन पद्धति और पाठ्यक्रम की अपेक्षाओं को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
उन्होंने बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सराहना की। राठौड़ ने कहा कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का स्टाफ अनुभवी और सक्षम है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी पूर्व में बोर्ड में सदस्य के रूप में सेवाएं दे चुके हैं, इसलिए बोर्ड की कार्यप्रणाली, चुनौतियों और आवश्यकताओं से पूरी तरह परिचित हैं।
नए अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड के परिणामों को बेहतर बनाने और राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए शिक्षकों, मूल्यांकनकर्ताओं और प्रशासनिक स्टाफ से निरंतर संवाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीमवर्क और समन्वय के आधार पर बोर्ड की कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा।
पदभार ग्रहण करने की खुशी में कार्यालय पहुंचे स्थानीय स्कूली बच्चों को हनुमान सिंह राठौड़ ने अपने हाथों से मिठाई खिलाई और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बच्चों से मेहनत, अनुशासन और नियमित अध्ययन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड से जुड़े विवादों पर पूछे गए सवाल पर नवनियुक्त अध्यक्ष ने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एक प्रतिष्ठित और मजबूत संस्था है। संस्था कभी विवादों में नहीं रही, बल्कि कुछ व्यक्तियों के फैसलों और कार्यशैली के कारण विवाद उत्पन्न हुए थे।
उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति या विवाद की गुंजाइश को समाप्त करने के लिए पारदर्शिता, समयबद्धता और बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड की नई कार्यशैली का आधार टीमवर्क, जवाबदेही और विद्यार्थी हित रहेगा।
दूर-दराज के विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुविधा को लेकर भी नए अध्यक्ष ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी भी कोने में रहने वाले छात्र को छोटे-मोटे दस्तावेजों, संशोधन, माइग्रेशन सर्टिफिकेट या अन्य प्रमाणपत्रों के लिए बार-बार अजमेर मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि बोर्ड ने संभाग और जिला स्तर पर अधिकृत छात्र सहायता केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों की कार्यप्रणाली को और अधिक सुगम, प्रभावी और डिजिटल बनाया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को अपने गृह जिले में ही आवश्यक सेवाएं समय पर मिल सकें।
हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि बोर्ड का प्रयास रहेगा कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल सेवाओं, सहायता केंद्रों और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से बोर्ड को विद्यार्थी हितैषी संस्था के रूप में और मजबूत किया जाएगा।
कुल मिलाकर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक स्थिरता, NEP आधारित परीक्षा सुधार, पाठ्यक्रम बदलाव, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में नई शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में बोर्ड शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को किस तरह आगे बढ़ाता है।