Friday, 12 June 2026

नकली खाद-बीज माफिया से कृषि मंत्री को खतरा? भाई जगमोहन मीणा के बयान से बढ़ी सियासी हलचल


नकली खाद-बीज माफिया से कृषि मंत्री को खतरा? भाई जगमोहन मीणा के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

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दौसा। राजस्थान में कथित बीज और खाद घोटाले को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के भाई और भाजपा नेता जगमोहन मीणा के बयान ने नया राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विवाद खड़ा कर दिया है। राजस्थान राज्य बीज निगम के पूर्व अशासकीय निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई के बाद जहां कांग्रेस कृषि मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है, वहीं जगमोहन मीणा ने दावा किया है कि नकली खाद और बीज कारोबार से जुड़े माफिया तत्व कृषि मंत्री की जान के पीछे पड़े हुए हैं।

दौसा में मीडिया से बातचीत करते हुए जगमोहन मीणा ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा हाल के महीनों में नकली खाद, घटिया बीज और अवैध कारोबारी नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई से कई प्रभावशाली लोगों के आर्थिक हित प्रभावित हुए हैं। उनके अनुसार, विभाग की सख्ती के कारण करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार पर असर पड़ा है, जिससे संबंधित तत्व बौखलाए हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में नकली खाद और बीज का कारोबार करने वाले कुछ संगठित समूह लंबे समय से सक्रिय हैं और उनके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचने के कारण वे कृषि मंत्री के खिलाफ साजिश रच सकते हैं। जगमोहन मीणा ने कहा कि ऐसे तत्व किसी भी हद तक जा सकते हैं और मंत्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब कृषि विभाग और राज्य बीज निगम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। विपक्ष लगातार मंत्री की जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि मंत्री पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

जगमोहन मीणा के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि अब तक सुरक्षा एजेंसियों या पुलिस की ओर से किसी संभावित खतरे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं विपक्षी दलों ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाने की मांग दोहराई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एसीबी की कार्रवाई, भ्रष्टाचार के आरोपों और अब मंत्री की सुरक्षा को लेकर सामने आए दावों ने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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