



चोमू। जयपुर जिले की चोमू तहसील स्थित अशोक विहार कॉलोनी में सरकारी बोरिंग पर लगी सार्वजनिक पानी की टोंटी को अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा दो बार तोड़े जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से कॉलोनी के निवासियों में रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सार्वजनिक सुविधा क्षेत्र के उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिनके घरों तक नियमित जलापूर्ति नहीं पहुंचती।
अशोक विहार निवासी रमेश कुमार रावत, जो वर्तमान में सिक्किम की राजधानी गंगटोक में कार्यरत हैं, ने इस संबंध में चोमू थाना प्रभारी हरमेंद्र सिंह को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजकर अज्ञात आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पुलिस से क्षेत्र में रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने का भी अनुरोध किया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार सरकारी बोरिंग पर लगी यह सार्वजनिक टोंटी कॉलोनी के कई परिवारों के लिए पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके अलावा कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना, साफ-सफाई और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए भी इसी जल स्रोत का उपयोग किया जाता है। टोंटी टूट जाने के कारण लोगों को आवश्यकता पड़ने पर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है।
इस मामले में जलदाय विभाग के सहायक अभियंता सुनील कुमावत ने कहा कि चोमू क्षेत्र में कई सार्वजनिक बोरिंगों पर टोंटियां लगी हुई हैं, लेकिन किसी एक स्थान पर बार-बार टोंटी तोड़े जाने की शिकायत पहली बार सामने आई है। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए इसे गंभीर और चिंताजनक बताया।
जानकारी के अनुसार सार्वजनिक टोंटी लगाने का खर्च भी स्थानीय स्तर पर जनसहयोग से वहन किया गया था। पहली बार टोंटी टूटने के बाद इसे पुनः लगाया गया, लेकिन कुछ समय बाद अज्ञात लोगों ने फिर इसे क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद भी कॉलोनीवासियों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए तीसरी बार अपने खर्च पर नई टोंटी लगवाई है।
मामले की सूचना मिलने पर पुलिस ने क्षेत्र में पड़ताल की। एक पुलिसकर्मी को मौके पर भेजकर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, लेकिन घटनास्थल कैमरों की सीधी निगरानी में नहीं होने के कारण संदिग्धों की पहचान नहीं हो सकी। पुलिस अब अन्य संभावित सुरागों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
स्थानीय नागरिकों, जिनमें दिनेश अग्रवाल, देवकी नंदन अग्रवाल तथा भुवनेश तिवारी शामिल हैं, ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जल जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधा को नुकसान पहुंचाना सामाजिक और नैतिक दृष्टि से गंभीर अपराध है।
