



जयपुर। जगतपुरा रोड चौड़ीकरण परियोजना के तहत नंदपुरी अंडरपास स्थित नूरानी मस्जिद को हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। मस्जिद कमेटी और विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया है, जबकि जेडीए का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है।
राजस्थान मुस्लिम फोरम ने दावा किया कि नूरानी मस्जिद से संबंधित सभी वैध दस्तावेज, भूमि अभिलेख, वक्फ रिकॉर्ड, लैंड यूज परिवर्तन और अन्य आवश्यक कागजात मस्जिद कमेटी के पास मौजूद हैं। फोरम का आरोप है कि मस्जिद पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जबकि इस मामले में 10 जून को वक्फ ट्रिब्यूनल में सुनवाई प्रस्तावित थी।
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि कार्रवाई की परिस्थितियां संदेह उत्पन्न करती हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि इसे जल्दबाजी में अंजाम दिया गया। वहीं मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि वे न्याय के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे और आगामी जुम्मे की नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
दूसरी ओर जेडीए का कहना है कि मालवीय नगर से जगतपुरा मार्ग के चौड़ीकरण कार्य के तहत सड़क की निर्धारित चौड़ाई 80 फीट सुनिश्चित करना आवश्यक था। प्राधिकरण के अनुसार नूरानी मस्जिद के समीप सड़क कई स्थानों पर सिकुड़कर लगभग 25 फीट रह गई थी, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी। जेडीए का दावा है कि संबंधित पक्षों को पूर्व में कई बार नोटिस जारी किए गए थे और कार्रवाई मास्टर प्लान के अनुरूप की गई।
गौरतलब है कि 8 जून को जेडीए ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हुए कुल पांच धार्मिक स्थलों को हटाया था। इनमें नूरानी मस्जिद, एक मजार, दो मंदिर और एक सत्संग हाल शामिल थे। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था तथा संवेदनशील क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था।
मस्जिद कमेटी का कहना है कि नूरानी मस्जिद लगभग 42 वर्ष पुरानी थी और समय के साथ इसका विस्तार हुआ था। उनका दावा है कि इसे अतिक्रमण बताना तथ्यों के विपरीत है। वहीं जेडीए का कहना है कि मास्टर प्लान 1998 में ही इस सड़क की चौड़ाई निर्धारित कर दी गई थी और उसी के अनुसार विकास कार्य किए जा रहे हैं।
इस बीच दिलचस्प तथ्य यह भी रहा कि जिन दो मंदिरों और एक सत्संग हाल को हटाया गया, उनके प्रबंधन की ओर से अब तक किसी प्रकार का सार्वजनिक विरोध सामने नहीं आया है। वहीं स्थानीय निवासियों का एक वर्ग सड़क चौड़ीकरण का समर्थन कर रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस क्षेत्र में यातायात जाम की समस्या बनी हुई थी और सड़क विस्तार से आम लोगों को राहत मिलेगी।
अब सभी की निगाहें वक्फ ट्रिब्यूनल में होने वाली आगामी कानूनी प्रक्रिया और इस मामले में आगे आने वाले प्रशासनिक एवं न्यायिक निर्णयों पर टिकी हैं।