



टोंक। बनास नदी पर गहलोद में निर्मित हाई लेवल ब्रिज का लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अनुसार भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के निर्धारित मानकों के अनुरूप पुल पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है और शनिवार सुबह से इस पर यातायात संचालन शुरू कर दिया जाएगा। पुल के शुरू होने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों को बरसात के दौरान होने वाली आवागमन की परेशानी से स्थायी राहत मिलेगी।
सार्वजनिक निर्माण विभाग खंड टोंक के अधिशाषी अभियंता नागेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि 26 मई से प्रारंभ हुआ लोड टेस्ट शनिवार सुबह 6 बजे पूर्ण होगा। परीक्षण के दौरान पुल की भार क्षमता, संतुलन, संरचनात्मक मजबूती और रिकवरी क्षमता की पांच चरणों में जांच की गई। विभागीय अधिकारियों तथा थर्ड पार्टी तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में सभी परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुसार संपन्न किए गए।
लोड टेस्ट के दूसरे चरण में नौ ट्रकों को पुल पर क्रमवार खड़ा किया गया, जिनमें प्रत्येक ट्रक का वजन 27 टन था। इस प्रकार पुल पर कुल 243 टन भार डालकर उसकी क्षमता का परीक्षण किया गया। तीसरे चरण में इन ट्रकों को 24 घंटे तक पुल पर खड़ा रखकर प्रति घंटे डिफ्लेक्शन (झुकाव) का अध्ययन किया गया। इसके बाद क्रमवार ट्रकों को हटाकर रिकवरी क्षमता का परीक्षण किया गया।
अधिकारियों के अनुसार पुल ने आईआरसी मानकों के अनुरूप 85 प्रतिशत से अधिक रिकवरी दर्ज की, जो इसे यातायात संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित सिद्ध करती है। परीक्षण के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने भी कई बार मौके का निरीक्षण कर कार्यों की समीक्षा की।
गहलोद क्षेत्र के लिए यह पुल विशेष महत्व रखता है। बरसात के मौसम में बनास नदी पर स्थित पुराना रपटा क्षतिग्रस्त होने के कारण लगभग 30 से 40 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता था। ग्रामीणों को टोंक पहुंचने के लिए लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता था। नए हाई लेवल ब्रिज के निर्माण से अब वर्षभर निर्बाध आवागमन संभव हो सकेगा और क्षेत्र के लोगों को स्थायी समाधान मिलेगा।
सहायक अभियंता महेश चौधरी ने बताया कि लोड टेस्ट के दौरान विभाग के सहायक अभियंताओं और कनिष्ठ अभियंताओं की क्रमवार ड्यूटी लगाई गई थी। उनके माध्यम से डिफ्लेक्शन और रिकवरी संबंधी आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण किया गया। उन्होंने आमजन से पुल पर यातायात नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित आवागमन करने की अपील भी की।
पुल का परीक्षण अनुबंध की शर्तों के अनुसार थर्ड पार्टी एजेंसी अम्बे टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैब लिमिटेड द्वारा विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति में कराया गया। विभागीय तकनीकी टीम ने दिन-रात निगरानी रखते हुए परीक्षण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इसके साथ ही विभाग ने बताया कि पुल की डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डीएलपी) अवधि 10 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसके दौरान संरचना की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी संवेदक की रहेगी।