



नागौर। कुचामन सिटी में शुक्रवार को भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के बीच राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आ गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन आगमन के दौरान आरएलपी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और राजनीतिक विरोध के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों को हटाया और नौ कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के तहत आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए कुचामन पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर उनके पहुंचते ही पहले से मौजूद आरएलपी समर्थकों ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और काले झंडे दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल से दूर किया, जिससे किसी बड़े टकराव की स्थिति नहीं बनी।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से भेराना धाम और रीको क्षेत्र आवंटन विवाद को लेकर भाजपा और आरएलपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर राजनीतिक लाभ लेने और जनता को भ्रमित करने के आरोप लगा रहे हैं। इसी विवाद की पृष्ठभूमि में कुचामन का यह विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति मिर्धा ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आरएलपी ने धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहले से ही साधु-संतों की मांगों के समाधान की दिशा में कार्य कर रही थी, लेकिन आरएलपी ने इसे राजनीतिक मंच बनाकर लाभ उठाने की कोशिश की।
मिर्धा ने हनुमान बेनीवाल की भाषा शैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं होने के बावजूद वे स्वयं को मुख्यमंत्री की तरह प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर की गई कुछ टिप्पणियों को राजनीतिक मर्यादाओं के विपरीत बताया।
वहीं भाजपा नागौर जिलाध्यक्ष रामधन पोटलिया ने भी हाल ही में आरोप लगाया था कि हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma भजनलाल शर्मा के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन राजनीतिक संवाद में भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
कुचामन की इस घटना ने नागौर और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा तथा आरएलपी के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
