



राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की गई है। पूर्व विधायक एवं हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रहे संयम लोढ़ा ने यह कैविएट दाखिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि यदि राज्य सरकार या राज्य चुनाव आयोग राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हैं तो पहले उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद ही कोई आदेश पारित किया जाए।
पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार तथा राज्य चुनाव आयोग ने राजस्थान हाईकोर्ट से दिसंबर 2026 तक का समय मांगा था। हालांकि हाईकोर्ट ने 22 मई को सुनाए गए फैसले में राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी। अब संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार अथवा राज्य चुनाव आयोग इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए संयम लोढ़ा ने पहले ही कैविएट दायर कर दी है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत कैविएट दायर करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि अदालत किसी भी पक्ष की अपील पर बिना दूसरे पक्ष को सुने कोई अंतरिम आदेश पारित न करे। ऐसे में यदि सरकार या चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं तो अदालत को पहले संयम लोढ़ा का पक्ष भी सुनना होगा। यह मामला अब प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनावों की समय सीमा तथा संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।