



जयपुर | जयपुर में बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन पर शनिवार को राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कब्जा ले लिया। करीब 2200 करोड़ रुपए कीमत की इस जमीन पर लंबे समय से कथित रूप से भूमाफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनी बसाई गई थी। कार्रवाई के दौरान बोर्ड प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कई बाउंड्रीवाल, कच्चे-पक्के मकान और अन्य निर्माण ध्वस्त किए तथा जमीन पर कब्जे के बोर्ड और साइनेज लगाए। प्रशासन ने रविवार को भी कार्रवाई जारी रखने की बात कही है, जिसमें कई बड़े अवैध स्ट्रक्चर हटाए जाएंगे।
हाउसिंग बोर्ड की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि भूमाफियाओं ने जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के नाम पर भूखंडों का आवंटन दिखाकर जमीन पर कॉलोनी विकसित कर दी थी। कई प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को भी कथित रूप से बेहद कम कीमतों पर प्लॉट बेचे गए थे।
इससे पहले 16 अप्रैल को भी हाउसिंग बोर्ड ने कब्जा लेने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय विरोध और उच्च स्तर पर हस्तक्षेप के कारण कार्रवाई बीच में रोक दी गई थी। बाद में कॉलोनी के कुछ लोगों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्टे हासिल कर लिया था। हालिया सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्टे खारिज करते हुए हाउसिंग बोर्ड को कब्जा लेने की अनुमति दे दी, जिसके बाद बोर्ड प्रशासन ने दोबारा कार्रवाई शुरू की।
जानकारी के अनुसार, इस जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में शुरू की थी और 1991 तक अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी भी कर ली गई थी। हालांकि, लंबे समय तक जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं लिया गया। इसी बीच कथित रूप से भूमाफियाओं ने जमीन पर अवैध कब्जा कर कॉलोनी विकसित कर दी।
बताया जा रहा है कि कागजों में भूखंडों की खरीद-बिक्री भी दर्शा दी गई थी। वर्षों तक इस जमीन को लेकर विवाद चलता रहा और धीरे-धीरे वहां निर्माण भी होने लगे।
वर्ष 2019 में कॉलोनी के नियमन को लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने हाउसिंग बोर्ड से एनओसी मांगी थी, लेकिन उस समय आवासन मंडल प्रशासन ने इसे देने से इनकार कर दिया था। बोर्ड का कहना था कि जमीन पर 50 प्रतिशत निर्माण भी नहीं हुआ है, ऐसे में कॉलोनी के नियमन का कोई औचित्य नहीं बनता।
इसके बाद सहकारी समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी और मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को भी भेजा गया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद बोर्ड प्रशासन ने जमीन खाली करवाने की कार्रवाई तेज कर दी है।
हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कब्जा हटाने की पूरी प्रक्रिया न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।