



जयपुर | राजस्थान में लंबे समय से अटके पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव अब तेजी से आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। चुनावों में सबसे बड़ी बाधा बने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और राज्य ओबीसी आयोग के स्तर पर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार पंचायत राज विभाग अब करीब 400 ग्राम पंचायतों और कुछ पंचायत समितियों के लंबित आबादी संबंधी आंकड़े जुटाकर राज्य ओबीसी आयोग को भेजने की तैयारी में है। इसी डेटा के आधार पर आयोग अपनी अंतिम आरक्षण रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगा।
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 31 जुलाई 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
राज्य ओबीसी आयोग ने फरवरी 2026 में राज्य सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि करीब 400 ग्राम पंचायतों के आंकड़े अधूरे होने के कारण ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही है। नई ग्राम पंचायतों के गठन और परिसीमन के चलते रिकॉर्ड संकलन में तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं।
नई परिसीमन व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायतों में 3000 तक आबादी पर 7 वार्ड निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त 1000 आबादी पर 2 नए वार्ड जोड़े जाने का प्रावधान रखा गया है।
नई व्यवस्था के तहत पंचायत समितियों में 1 लाख तक आबादी पर 15 वार्ड निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त 15 हजार आबादी पर 2 अतिरिक्त वार्ड बनाए जाएंगे।
इसी तरह जिला परिषदों में 4 लाख तक आबादी पर 17 वार्ड तय किए गए हैं और प्रत्येक अतिरिक्त 1 लाख आबादी पर 2 नए वार्ड जोड़ने का प्रावधान किया गया है।
नए परिसीमन के बाद प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं की संख्या में बड़ा बदलाव हुआ है।
जिला परिषद: 33 से बढ़कर 41
पंचायत समितियां: 365 से बढ़कर 457
ग्राम पंचायतें: 11,194 से बढ़कर 14,403
इस बदलाव के कारण चुनावी गणित और आरक्षण प्रक्रिया दोनों अधिक जटिल हो गई हैं।
यदि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार जुलाई 2026 तक चुनाव कराए जाते हैं, तब भी प्रदेश की 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों में चुनाव दूसरे चरण में ही होंगे। इसकी वजह इन संस्थाओं का वर्तमान कार्यकाल अभी पूरा नहीं होना बताया जा रहा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि पंचायत और निकाय चुनाव अब और नहीं टाले जा सकते। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि केवल ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके बाद सरकार, पंचायत राज विभाग और राज्य ओबीसी आयोग के बीच लगातार समन्वय और मंथन चल रहा है।
अब प्रदेश में राजनीतिक दलों, संभावित उम्मीदवारों और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आरक्षण का अंतिम फार्मूला तय होगा और इसके साथ ही पंचायत एवं निकाय चुनावों का पूरा रोडमैप स्पष्ट हो जाएगा।