



जयपुर | राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर ओबीसी आरक्षण का मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विषय बन गया है। यदि ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट तय समय पर पेश नहीं कर पाता है तो राज्य सरकार शहरी आबादी में ओबीसी वर्ग की लगभग 21 प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर करीब 2150 वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर सकती है।
प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में कुल 10,245 वार्डों पर चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण प्रक्रिया पहले ही तय की जा चुकी है। अब सबसे ज्यादा नजर ओबीसी आरक्षण के अंतिम फॉर्मूले पर टिकी हुई है।
राजस्थान के सात संभागों में कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें—
10 नगर निगम
47 नगर परिषद
19 द्वितीय श्रेणी नगरपालिकाएं
58 तृतीय श्रेणी नगरपालिकाएं
175 चतुर्थ श्रेणी नगरपालिकाएं शामिल हैं।
प्रदेश में कुल 10,245 वार्डों में चुनाव होंगे। इनमें जयपुर संभाग सबसे बड़ा है, जहां 91 नगरीय निकाय और 2970 वार्ड प्रस्तावित हैं। वहीं कोटा और उदयपुर संभाग में 28-28 निकाय शामिल हैं।
सरकार की ओर से जारी प्रारंभिक आरक्षण प्रक्रिया के अनुसार—
एससी वर्ग के लिए 1795 वार्ड
एसटी वर्ग के लिए 399 वार्ड आरक्षित किए जा चुके हैं।
पिछले चुनाव की तुलना में एससी वर्ग के लिए 552 और एसटी वर्ग के लिए 161 अतिरिक्त वार्ड बढ़े हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आती है, तो सरकार शहरी क्षेत्रों में ओबीसी आबादी के अनुमानित 21 प्रतिशत हिस्से के आधार पर करीब 2150 वार्ड आरक्षित कर सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट में भी लगभग इसी अनुपात के आंकड़े सामने आने की संभावना है।
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता तय समय पर चुनाव कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, लेकिन यदि रिपोर्ट समय पर नहीं आती है तो भी चुनाव प्रक्रिया नहीं रोकी जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी वर्गों को नियमानुसार प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 31 जुलाई 2026 से पहले कराने के निर्देश दे चुका है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार के समय बढ़ाने संबंधी प्रार्थना पत्र को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने ओबीसी आयोग को 20 जून 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा भी तय की है। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि तय समय तक रिपोर्ट नहीं आती है तो राज्य निर्वाचन आयोग अपनी चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाए।
अब पूरे प्रदेश की नजर राज्य सरकार, ओबीसी आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। राजनीतिक दल भी आरक्षण और परिसीमन के अंतिम फॉर्मूले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यही निकाय चुनावों का पूरा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तय करेगा।