Saturday, 29 August 2026

राजस्थान पर कर्ज का बढ़ता बोझ: दो साल में ₹1.19 लाख करोड़ बढ़ा सार्वजनिक ऋण, आमजन पर बढ़ा आर्थिक दबाव


राजस्थान पर कर्ज का बढ़ता बोझ: दो साल में ₹1.19 लाख करोड़ बढ़ा सार्वजनिक ऋण, आमजन पर बढ़ा आर्थिक दबाव

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जयपुर | राजस्थान सरकार पर सार्वजनिक ऋण का बोझ लगातार तेजी से बढ़ रहा है। विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 तक राज्य पर कुल बकाया कर्ज बढ़कर ₹5,65,814.94 करोड़ पहुंच गया है। जबकि 31 मार्च 2024 को यह राशि ₹4,46,651.63 करोड़ थी। यानी लगभग दो वर्षों में राज्य के कुल ऋण में करीब ₹1.19 लाख करोड़ की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

यह जानकारी 16 वीं विधानसभा के पंचम सत्र में विधायक यूनुस खान द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में सामने आई है। आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि राज्य सरकार अब ऐसे वित्तीय चक्रव्यूह में फंसती दिखाई दे रही है, जहां पुराने ऋण की अदायगी के लिए भी नया कर्ज लेना मजबूरी बनता जा रहा है।

पुराने ऋण चुकाने के लिए लेना पड़ रहा नया कर्ज

वित्त विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार को ₹1,99,124.02 करोड़ की ऋण अदायगी करनी पड़ी। इसके लिए सरकार ने ₹2,62,542.41 करोड़ का नया ऋण लिया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद भी राज्य के कुल कर्ज में ₹63,418.40 करोड़ की शुद्ध वृद्धि हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता ऋण भविष्य में विकास योजनाओं और वित्तीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। यदि ऋण प्रबंधन नियंत्रित नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में ब्याज भुगतान और वित्तीय दबाव और अधिक बढ़ सकता है।

आम जनता पर बढ़ा सीधा आर्थिक भार

सरकार के स्वयं के कर राजस्व में 2023-24 की तुलना में 2025-26 में 20.68 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर भी पड़ा है। जमीन-मकान की रजिस्ट्री, वाहन खरीद और अन्य सेवाएं महंगी होती गई हैं।

स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क में भारी वृद्धि

  • 2023-24: ₹9,181.49 करोड़

  • 2025-26: ₹12,400.54 करोड़

  • वृद्धि: लगभग 35 प्रतिशत

मोटर वाहन कर में भी बढ़ोतरी

  • 2023-24: ₹6,703.59 करोड़

  • 2025-26: ₹8,325.03 करोड़

इन प्रमुख कर मदों में वृद्धि के कारण आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के राजस्व संग्रहण में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा अप्रत्यक्ष रूप से आम जनता से ही आ रहा है।

सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए उठाए कदम

राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें नई आबकारी नीति, डिजिटलाइजेशन और निगरानी तंत्र को मजबूत करना शामिल है।

नई आबकारी नीति से बढ़ी आय

सरकार ने अवैध शराब और कर चोरी पर रोक लगाने के लिए नई आबकारी नीति लागू की। इसके चलते आबकारी राजस्व ₹13,224.81 करोड़ से बढ़कर ₹16,401.88 करोड़ पहुंच गया।

डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार

आईटी आधारित सेवाओं और ऑनलाइन सिस्टम को बढ़ावा देकर राजस्व संग्रहण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया।

डेटा आधारित निगरानी

सरकार ने प्रवर्तन और निगरानी तंत्र को मजबूत करते हुए डेटा आधारित मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया है।

जीएसटी से सबसे ज्यादा कमाई, वाणिज्यिक कर विभाग पर सवाल

राज्य के खजाने में सबसे बड़ा योगदान जीएसटी का रहा।

  • 2023-24: ₹38,015.97 करोड़

  • 2025-26: ₹45,052.42 करोड़

खनिज राजस्व भी बढ़कर ₹10,381.52 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि दूसरी ओर वाणिज्यिक कर विभाग के आंकड़ों में अपेक्षित वृद्धि नहीं दिखाई दी।

  • 2023-24: ₹23,473.19 करोड़

  • अगले वर्ष गिरावट और बाद में मामूली सुधार

इसे लेकर विभागीय कार्यप्रणाली और राजस्व प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बढ़ते ऋण और महंगाई के बीच सरकार के सामने चुनौती

राजस्थान सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती दिखाई दे रही है। एक तरफ बढ़ते सार्वजनिक ऋण का दबाव है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता पर बढ़ते कर और महंगाई का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में सरकार को विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी।

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