Sunday, 24 May 2026

बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट पशु वध पर रोक बरकरार


बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट पशु वध पर रोक बरकरार

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कोलकाता | कलकत्ता हाईकोर्ट ने बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार की पशु वध संबंधी गाइडलाइन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना आवश्यक फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय, भैंस, बैल या बछड़े का वध नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने कहा कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु का वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए यह भी कहा कि ईद-उल-जुहा के दौरान गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं मानी गई है।

यह मामला उस समय और चर्चा में आया जब पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य सरकार की गाइडलाइन का विरोध करते हुए ईद पर हर हाल में कुर्बानी करने की बात कही। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में अवैध बूचड़खानों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।

दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को गोहत्या से जुड़े वर्ष 1950 के कानून और वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया था। इसमें स्पष्ट किया गया था कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के किसी भी मवेशी या भैंस का वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

सरकार की गाइडलाइन के अनुसार फिटनेस सर्टिफिकेट केवल नगरपालिका अध्यक्ष, पंचायत समिति प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक की संयुक्त सहमति से जारी किया जाएगा। यह प्रमाणपत्र तभी दिया जाएगा जब संबंधित प्राधिकारी इस बात से संतुष्ट हों कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है, प्रजनन योग्य नहीं है, बूढ़ा, घायल, अपंग या लाइलाज बीमारी से पीड़ित है।

राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी बूचड़खानों पर भी रोक लगा दी है। आदेश के अनुसार पशु वध केवल नगरपालिका द्वारा मान्यता प्राप्त बूचड़खानों या स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही किया जा सकेगा।

गाइडलाइन में नियमों के उल्लंघन पर सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। नियम तोड़ने पर छह महीने तक की जेल, एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इनकार किया जाता है तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकता है।

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