



नई दिल्ली | नीट पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार पेपर लीक गिरोह अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की आर्थिक स्थिति के आधार पर 5 लाख से लेकर 50 लाख रुपए तक में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराता था। गिरोह द्वारा रकम की सुरक्षा के लिए परिजनों से ब्लैंक चेक और छात्रों के दस्तावेज भी लिए जाते थे।
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा महाराष्ट्र का एक कोचिंग संचालक कथित रूप से भारी आर्थिक लाभ कमाने के बाद करीब 8 एकड़ जमीन पर स्कूल और कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहा था। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े आर्थिक लेन-देन, संपत्तियों और सहयोगियों की भी जांच कर रही है।
जांच के मुताबिक पेपर बेचने की कोई निश्चित कीमत तय नहीं थी। आरोपी परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक प्रभाव और भुगतान क्षमता के आधार पर रकम तय करते थे। प्रारंभिक चरण में पूरी राशि नहीं ली जाती थी, बल्कि केवल टोकन मनी ली जाती थी। गिरोह का दावा था कि परीक्षा से पहले उपलब्ध कराया गया “क्वेश्चन बैंक” ही वास्तविक प्रश्नपत्र है।
सीबीआई के अनुसार सौदे की शर्त यह होती थी कि परीक्षा के बाद जब उत्तर कुंजी सामने आए और यह साबित हो जाए कि दिए गए प्रश्न असली पेपर से मेल खाते हैं, तभी शेष रकम का भुगतान किया जाएगा। इसी कारण आरोपियों द्वारा कई परिवारों से ब्लैंक चेक और जरूरी दस्तावेज भी सुरक्षा के तौर पर रखे गए थे।
हालांकि परीक्षा के बाद कई परिजनों ने शेष रकम देने से इनकार करना शुरू कर दिया। कुछ परिवारों का कहना था कि फिजिक्स विषय के कुछ प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल नहीं खा रहे थे। वहीं कुछ परिजनों ने आधी रकम देने के बाद बाकी राशि परिणाम आने के बाद देने की बात कही। सीबीआई अब इस पूरे मामले में पेपर लीक नेटवर्क, कोचिंग संस्थानों, एजेंटों और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच कर रही है। एजेंसी विभिन्न राज्यों में जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल सबूतों के आधार पर नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।