Wednesday, 20 May 2026

प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का हमला, बोले- सरकार जारी करे श्वेत पत्र


प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का हमला, बोले- सरकार जारी करे श्वेत पत्र

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राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज और विकास कार्यों पर घटते खर्च को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक हालात की जानकारी मिल सके।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने लगातार जिन मुद्दों को उठाया था, अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने उन पर पूरी तरह मुहर लगा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पांच साल और दो साल की तुलना को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की, लेकिन अब सच्चाई सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज विकास में नहीं बल्कि कर्ज लेने में सबसे आगे पहुंच गया है। कैग की रिपोर्ट सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को उजागर कर रही है। जूली के अनुसार राज्य सरकार विकास के दावों के बावजूद पूंजीगत खर्च करने में विफल रही है।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने विकास बजट का केवल 51.82 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च कर पाई है। उन्होंने कहा कि जब अस्पताल, स्कूल और सड़कें नहीं बनेंगी तो युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा। उनके अनुसार प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने दावा किया कि सरकार ने बजट अनुमान से 65 प्रतिशत अधिक यानी करीब 71 हजार 261 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज लिया है, जो प्रदेश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों जैसे तेलंगाना और कर्नाटक विकास खर्च के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि राजस्थान को कर्ज के बोझ में धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजकोषीय घाटा कम दिखाने के लिए पूंजीगत खर्च में लगभग 28 प्रतिशत की कटौती कर दी। उनके अनुसार इससे भविष्य की आधारभूत संरचनाओं और विकास परियोजनाओं का निर्माण प्रभावित होगा और इसका असर लंबे समय तक प्रदेश को भुगतना पड़ेगा।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े विकास दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति धीमी पड़ चुकी है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार आर्थिक स्थिति और कर्ज प्रबंधन को लेकर पूरी पारदर्शिता बरते और जनता के सामने वास्तविक आंकड़े रखे।

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