



अजमेर । अजमेर जिले के पुष्कर में कांग्रेस का बड़ा चिंतन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने, चुनावी रणनीति तैयार करने और जनहित के मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में 23 मई से 1 जून तक यह 10 दिवसीय शिविर आयोजित होगा। शिविर की मेजबानी अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी करेगी। कार्यक्रम पुष्कर स्थित डॉ. राजकुमार जयपाल के रिसोर्ट “वाइल्ड रोज” में आयोजित किया जाएगा।
इस शिविर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गेभी दो दिन तक मौजूद रहेंगे। इनके अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अलग-अलग सत्रों में भाग लेंगे।
शिविर में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में राष्ट्रीय संगठन महामंत्रीकेसी वेणुगोपाल, राजस्थान के प्रभारीसुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रतिपक्ष नेताटीकाराम जूली, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलटt और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. सीपी जोशी शामिल हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार शिविर में संगठन विस्तार, मीडिया प्रबंधन, चुनाव संचालन, जनसंपर्क और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रतिदिन वरिष्ठ नेताओं और रणनीतिकारों के साथ संवाद कार्यक्रम भी रखे जाएंगे।
25 मई को कांग्रेस पदाधिकारियों का विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड विजिट कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान प्रदेश प्रभारी, प्रदेशाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी गांवों में जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। वहीं 27 मई को मनरेगा कार्यस्थलों का निरीक्षण भी किया जाएगा।
शिविर में आने वाले नेताओं और पदाधिकारियों के लिए आवास, भोजन, परिवहन, चिकित्सा, पेयजल और स्वच्छता की विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसके लिए अलग-अलग टीमें बनाकर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डॉक्टर राजकुमार जयपाल ने कहा कि कांग्रेस संगठन द्वारा अजमेर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह शिविर संगठन को नई दिशा और ऊर्जा देने का काम करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की मौजूदगी वाला यह चिंतन शिविर आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।