Saturday, 29 August 2026

सुप्रीम कोर्ट बोला- खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है, लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि


सुप्रीम कोर्ट बोला- खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है, लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आम लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है और जो अधिकारी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में नागरिकों का कुत्तों के खतरे से मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भी शामिल है। अदालत ने आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी को लेकर नवंबर 2025 में जारी निर्देशों को वापस लेने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आदेश दिया था कि स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि इन कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए और दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए।

इसके साथ ही अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाई थी। इन निर्देशों के खिलाफ कुछ पशु प्रेमियों और गैर सरकारी संगठनों ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने देश के विभिन्न राज्यों में कुत्तों के काटने की घटनाओं पर चिंता जताई। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के श्री गंगानगर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं सामने आईं। इनमें कई छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं और कुछ मामलों में चेहरे पर गहरे घाव तक हो गए।

वहीं तमिलनाडु  में साल के पहले चार महीनों में लगभग दो लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। अदालत ने सूरतमें एक जर्मन नागरिक को कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसी घटनाएं शहरी प्रशासन पर लोगों का भरोसा कमजोर करती हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति

एन.वी. अंजारिया  की पीठ ने की।


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