



जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाली से जुड़े मामले में एकलपीठ द्वारा 19 दिसंबर 2025 को दिए गए दिशा-निर्देशों पर अंतरिम रोक लगा दी है। एकलपीठ ने अपने आदेश में राज्य सरकार को हर वर्ष छात्रसंघ चुनाव के लिए कैलेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे।
यह आदेश न्यायाधीश सुदेश बंसल और न्यायाधीश मनीष कुमार शर्मा की खंडपीठ ने शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने इस मामले में पक्षकार छात्र जयराव और अन्य से जवाब भी तलब किया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि मूल मामला राजस्थान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2025-26 के छात्रसंघ चुनाव आयोजित कराने से संबंधित था। उन्होंने कहा कि एकलपीठ ने चुनाव कराने की मूल मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन जनहित के आधार पर सरकार और राज्य चुनाव आयोग को व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर दिए।
महाधिवक्ता ने दलील दी कि यदि मामला वास्तव में जनहित से जुड़ा था तो अदालत को स्वतः संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि एकलपीठ ने याचिका के मूल दायरे से बाहर जाकर निर्देश जारी किए।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य चुनाव आयोग को भी दिशा-निर्देश दिए गए, जबकि आयोग इस मामले में पक्षकार ही नहीं था। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका केवल राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने तक सीमित थी, इसलिए निर्देश भी उसी दायरे में होने चाहिए थे।
खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद एकलपीठ के निर्देशों पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की आगामी सुनवाई में छात्रसंघ चुनावों को लेकर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।