Saturday, 16 May 2026

यमुना जल पाइपलाइन परियोजना को हरियाणा की लिखित सहमति, अब केंद्रीय जल आयोग को भेजी जाएगी डीपीआर


यमुना जल पाइपलाइन परियोजना को हरियाणा की लिखित सहमति, अब केंद्रीय जल आयोग को भेजी जाएगी डीपीआर

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नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्माऔर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच यमुना जल पाइपलाइन परियोजना को लेकर हुई बैठक के बाद हरियाणा सरकार ने अपनी लिखित सहमति भेज दी है। इससे पहले बुधवार को परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए मौखिक सहमति बनी थी।

अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग को भेजी जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि आयोग से जल्द स्वीकृति मिल सकती है, जिसके बाद परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

जानकारी के अनुसार हरियाणा ने विभिन्न स्थानों से पानी आवंटन की मांग रखी है। इसमें दानोदा कलां से 10 क्यूसेक, नयागांव के पास सारसौद डिस्ट्रीब्यूट्री से 80 क्यूसेक, चौधरी माइनर पर हिंदवान से 70 क्यूसेक, सरसना माइनर पर पाट्टन से 20 क्यूसेक, सेगा नरार से 2 क्यूसेक, कैथल टाउन के पास पेओदा से 43 क्यूसेक तथा चांदना मानस रोड से 41.83 क्यूसेक पानी शामिल है। इसके अतिरिक्त एक अन्य स्थान से भी पानी लिया जाएगा। राजस्थान को इस परियोजना से लगभग 1917 क्यूसेक पानी मिलने का अनुमान है। यह पाइपलाइन हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना के तहत हथिनी कुंड बैराज से राजस्थान के राजगढ़, चूरू तक पानी पहुंचाया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार हथिनी कुंड बैराज और राजगढ़ के बीच लगभग 110 मीटर का ऊंचाई अंतर है। राजगढ़ अपेक्षाकृत नीचे होने के कारण पानी प्राकृतिक ढलान के जरिए वहां तक पहुंचेगा। हालांकि परियोजना को हाईब्रिड मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें आवश्यक स्थानों पर पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे ताकि कम प्रवाह की स्थिति में पानी को पंप के माध्यम से आगे पहुंचाया जा सके।

परियोजना की अनुमानित लागत 33 हजार 379 करोड़ 29 लाख रुपए बताई गई है। इसमें लगभग 3900 करोड़ रुपए भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाएंगे।

परियोजना की आगामी प्रक्रिया के तहत केंद्रीय जल आयोग विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। स्वीकृति मिलने के बाद ऋण या केंद्रीय सहायता के जरिए वित्तीय संसाधन जुटाए जाएंगे। इसके बाद पाइपलाइन मार्ग में भूमि अधिग्रहण, निविदा प्रक्रिया और कार्यादेश जारी होने के पश्चात निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों, विशेषकर शेखावाटी इलाके के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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