



नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने शुक्रवार को आठवीं गिरफ्तारी की है। जांच एजेंसी ने पुणे से रसायन विज्ञान के प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को प्रश्न और उनके सही उत्तर उपलब्ध कराए थे।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी महाराष्ट्र के लातूर क्षेत्र से जुड़े हैं और रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ माने जाते हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि वे कई वर्षों तक नीट प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा रह चुके थे और उन्हें प्रश्नपत्र तक सीधी पहुंच प्राप्त थी।
जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी पुणे स्थित अपने निवास पर कोचिंग कक्षाएं संचालित करते थे। आरोप है कि वे परीक्षा से पहले ही संभावित प्रश्नों और उनके उत्तरों की जानकारी चुनिंदा अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराते थे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक 3 मई को हुई नीट परीक्षा से पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आरोपी मनीषा वाघमारे की सहायता से कई विद्यार्थियों तक लीक प्रश्नपत्र पहुंचाया गया था।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों, आर्थिक लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और राज्यों के बीच फैले संपर्कों की जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और प्रश्नपत्र को अलग-अलग माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
इस बीच नीट पेपर लीक प्रकरण से उत्पन्न तनाव और निराशा के बीच तीन विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर सामने आई है। दिल्ली की 20 वर्षीय छात्रा, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय युवक तथा गोवा के 17 वर्षीय छात्र ने कथित रूप से फांसी लगाकर जान दे दी। इन घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों पर पड़ रहे मानसिक दबाव को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
शिक्षा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों का छात्रों की मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई है।