



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पर तीखा हमला बोला है। जयपुर में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने से रोक नहीं पा रही है और परीक्षा सही तरीके से आयोजित नहीं कर पा रही है, तो उसे भंग कर देना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि पहले राज्यों के पास मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराने का अधिकार था और अब यह अधिकार वापस राज्यों को दे दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वर्ष 2026 की नीट परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी गई है, तो वर्ष 2024 और 2025 में हुए कथित पेपर लीक मामलों की जांच भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराई जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में लगातार सामने आए मामलों की गहन जांच क्यों नहीं करवाई गई।
पूर्व मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत ने कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो तीनों वर्षों के पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार हो रही अनियमितताओं से परीक्षा प्रणाली पर विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा अगले सत्र से नीट परीक्षा ऑनलाइन कराने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि वह इस विषय पर फिलहाल ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि उन्होंने मानेसर कांड का जिक्र करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान उस पूरे प्रकरण के प्रमुख किरदारों में शामिल थे।
पूर्व मुख्यमंत्रीगहलोत ने कहा कि यदि वह इस विषय पर ज्यादा बोलेंगे तो उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाने की बात कही जाएगी, इसलिए वह सीमित टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
इस दौरान अशोक गहलोत ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम जनता परेशान है और सरकार को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।