Friday, 15 May 2026

जयपुर क्रिकेट में परिवारवाद का दबदबा: 134 क्लबों में से 55 पर सिर्फ 5 परिवारों का नियंत्रण


जयपुर क्रिकेट में परिवारवाद का दबदबा: 134 क्लबों में से 55 पर सिर्फ 5 परिवारों का नियंत्रण

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जयपुर की क्रिकेट राजनीति में वर्षों से कुछ चुनिंदा परिवारों का प्रभाव बना हुआ है। जिला क्रिकेट संघ से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 134 क्लबों में से 55 क्लबों पर केवल 5 परिवारों का नियंत्रण है। इन क्लबों के जरिए चुनावी समीकरण प्रभावित किए जाते हैं और क्रिकेट प्रशासन पर लंबे समय से इन्हीं परिवारों की पकड़ बनी हुई है। खिलाड़ियों का आरोप है कि उन्हें न तो निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मिलती है और न ही मतदान का अधिकार।

जानकारी के अनुसार जयपुर जिला क्रिकेट संघ में मतदान का अधिकार केवल क्लब सचिवों को प्राप्त है। इसी कारण कई परिवारों ने अपने रिश्तेदारों, परिचितों और करीबी लोगों के नाम पर अनेक क्लब बना रखे हैं। इन क्लबों के माध्यम से चुनावों को प्रभावित किया जाता है। कुल 134 क्लबों में से 18 संस्थागत क्लबों को हटाने के बाद शेष क्लबों में से 40 प्रतिशत से अधिक पर केवल पांच परिवारों का प्रभाव बताया जा रहा है।

सबसे अधिक चर्चा पूर्व राजस्थान क्रिकेट संघ पदाधिकारी मोहम्मद इकबाल के परिवार की है। उनके परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े लगभग 20 क्लब बताए जा रहे हैं। इनमें उनके भाई, बेटे, रिश्तेदार और परिचित शामिल हैं। इसी प्रकार पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. बिमल सोनी का भी लगभग 20 क्लबों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव बताया जा रहा है। उनके परिवार के अलावा अस्पताल से जुड़े कर्मचारी और परिचित भी क्लबों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा सलीम खान से जुड़े पांच क्लब, ओम शर्मा से जुड़े चार क्लब तथा पूर्व रणजी कप्तान विनोद माथुर से जुड़े छह क्लबों का उल्लेख भी सामने आया है। आरोप है कि कई अन्य लोग भी दो या उससे अधिक क्लबों के जरिए चुनावी प्रभाव बनाए हुए हैं।

क्रिकेट से जुड़े लोगों का कहना है कि अधिकांश क्लबों के पास न तो खुद का मैदान है और न ही नियमित खेल गतिविधियां संचालित होती हैं। कई क्लब केवल चुनावी उद्देश्य से अस्तित्व में बताए जा रहे हैं। वहीं जिन क्लबों के पास वास्तविक मैदान और खिलाड़ी हैं, उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट जानकारों का कहना है कि वर्तमान खेल कानूनों और व्यवस्था ने परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। उनका मानना है कि जब तक व्यक्तिगत सदस्यों और पूर्व रणजी खिलाड़ियों को मतदान अधिकार नहीं दिए जाएंगे, तब तक क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित नहीं हो सकेगी।

जयपुर जिला क्रिकेट संघ में पिछले सात वर्षों से नियमित चुनाव नहीं हुए हैं और वर्तमान में तदर्थ समिति व्यवस्था संभाल रही है। ऐसे में क्रिकेट प्रशासन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि क्रिकेट के विकास के लिए पारदर्शी व्यवस्था और वास्तविक खिलाड़ियों की भागीदारी जरूरी है।

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