Thursday, 14 May 2026

पत्रकारिता अंधेरे में टॉर्च का काम करती है, बशर्ते वह सच पर आधारित हो: वसुन्धरा राजे


पत्रकारिता अंधेरे में टॉर्च का काम करती है, बशर्ते वह सच पर आधारित हो: वसुन्धरा राजे

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जयपुर में आयोजित मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने पत्रकारिता की भूमिका और जिम्मेदारी पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता अंधेरे में टॉर्च का काम करती है, लेकिन यह तभी सार्थक है जब वह पूरी तरह सच और तथ्यों पर आधारित हो। उन्होंने समाचार माध्यमों को टीआरपी की होड़ से बचने और जिम्मेदार पत्रकारिता करने की सलाह दी।

वसुन्धरा राजे ने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा के दौर में कई बार छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि “तिल को ताड़ और कंकड़ को पहाड़ बनाना पत्रकारिता नहीं है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाचार को केवल समाचार ही रहने देना चाहिए, उसमें अनावश्यक विचार और पूर्वाग्रह शामिल नहीं होने चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी वक्ता की बात को उसके संदर्भ में समझकर ही प्रकाशित या प्रसारित किया जाना चाहिए। यदि किसी बयान को लेकर भ्रम की स्थिति हो तो संबंधित व्यक्ति से स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए, लेकिन केवल “ब्रेकिंग न्यूज़” की दौड़ में अर्थ का अनर्थ करना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

अपने संबोधन में उन्होंने पत्रकारिता को लोकतंत्र का हृदय बताते हुए प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया— “खींचो न कमानों को, न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है कि कई बार “जो नहीं होगा, वो अखबार में आ जाएगा” जैसी प्रवृत्तियां देखने को मिलती हैं।

समारोह के दौरान मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड से विभिन्न पत्रकारों को सम्मानित किया गया। भास्कर के रिपोर्टर अर्पित शर्मा, आजतक के रिपोर्टर देवांकुर वाधवान, भास्कर डिजिटल के रिपोर्टर सौरभ गृहस्थी और इंडिया टुडे के फोटो पत्रकार पुरुषोत्तम दिवाकर को सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में फाउंडेशन की अध्यक्ष सुलक्षणा माथुर, वरिष्ठ पत्रकार अमित भट्ट, आशीष दत्ता और भाजपा नेता नीरज जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने पत्रकारिता में निष्पक्षता, सत्यता और सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर जोर दिया।

समारोह में बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल माध्यमों की चुनौतियों और मीडिया की विश्वसनीयता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

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