



राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) से जुड़े बहुचर्चित पेपर लीक मामलों की जांच अब उच्च स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने मंगलवार कोआरपीएससी के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ को पूछताछ के लिए तलब किया। उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई और बाद में शाम को छोड़ दिया गया। हालांकि, जांच एजेंसी ने उन्हें बुधवार सुबह 10:30 बजे दोबारा उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
एसओजी की टीम मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे जोधपुर स्थित डॉ. राठौड़ के आवास पहुंची थी। वहां से उन्हें जयपुर लाया गया, जहां एसओजी मुख्यालय में सुबह करीब 11 बजे पूछताछ शुरू हुई। प्रारंभिक दौर में अधिकारियों ने उनसे अकेले में पूछताछ की और उनके कार्यकाल के दौरान आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में उनकी भूमिका और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर सवाल किए गए। इसके बाद आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा के साथ उनकी संयुक्त पूछताछ भी की गई।
पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने कहा कि संबंधित परीक्षा से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और यह मामला उनके रिटायरमेंट के बाद का है। उन्होंने कहा कि एसओजी ने उनसे केवल तथ्यों के संबंध में जानकारी ली है।
एसओजी ने मंगलवार को अजमेर से आरपीएससी के यूडीसी मानसिंह मीणा को भी पूछताछ के लिए राउंडअप किया है। माना जा रहा है कि जांच एजेंसी अब पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े प्रशासनिक और आंतरिक स्तर के कनेक्शन खंगाल रही है।
एसओजी सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक से जुड़ा हुआ है। 10 मई को जयपुर स्थित एसओजी मुख्यालय में इस रैकेट का खुलासा किया गया था। जांच में सामने आया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र करीब 60 लाख रुपए में बेचा गया था।
जांच के दौरान पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड शेर सिंह मीणा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा का पेपर उसे तत्कालीन आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा द्वारा 60 लाख रुपए में उपलब्ध कराया गया था। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में शेर सिंह ने पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. शिव सिंह राठौड़ का नाम भी लिया है, जिसके बाद एसओजी ने उनसे पूछताछ का दायरा बढ़ाया है।