Wednesday, 13 May 2026

एसआई पेपरलीक मामले में जगदीश विश्नोई की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची राजस्थान सरकार


एसआई पेपरलीक मामले में जगदीश विश्नोई की जमानत रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची राजस्थान सरकार

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नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान सरकार ने एसआई भर्ती परीक्षा-2021 पेपरलीक मामले के आरोपी जगदीश विश्नोई को मिली जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए आरोपी जगदीश विश्नोई को नोटिस जारी किया।

राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि गंभीर आरोपों और जांच में जुटाए गए महत्वपूर्ण साक्ष्यों के बावजूद राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को आरोपी को जमानत दे दी थी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एसडी संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने अदालत में जमानत जारी रखने का विरोध करते हुए कहा कि जगदीश विश्नोई एसआई भर्ती-2021 पेपरलीक रैकेट का मास्टरमाइंड और किंगपिन था।

सरकार के अनुसार आरोपी ने सह-आरोपियों और सेंटर सुपरिंटेंडेंट राजेश खंडेलवाल के साथ मिलकर व्हाट्सएप के जरिए परीक्षा से पहले 10 लाख रुपए में प्रश्नपत्र हासिल किया। बाद में उसे हल करवाकर भारी रकम लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि जिन 25 अभ्यर्थियों को आरोपी ने लीक पेपर उपलब्ध करवाया, उन सभी का चयन भर्ती प्रक्रिया में हुआ।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच में आरोपी से एक अकाउंट डायरी बरामद हुई थी, जिसमें अभ्यर्थियों और पैसों के लेन-देन का पूरा विवरण दर्ज था। एफएसएल रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि डायरी में लिखावट जगदीश विश्नोई की ही है। सरकार ने यह भी कहा कि आरोपी वर्ष 2008 से इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है और हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ समान प्रकृति के 13 अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

सरकार ने अदालत को बताया कि इस व्यापक पेपरलीक साजिश में अब तक 139 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वर्तमान में मामला आरोपों पर बहस के चरण में लंबित है और लगभग 150 गवाहों के बयान अभी बाकी हैं। ऐसे में आरोपी की प्रभावशाली भूमिका को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।

उल्लेखनीय है कि जगदीश विश्नोई को 16 जनवरी 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ से जमानत मिली थी। हालांकि 19 जनवरी को जेल से बाहर आते ही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने उसे वर्ष 2020-21 के एक अन्य पेपरलीक मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया था। बाद में आरोपी की पत्नी ने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि चार साल पुराने मामले में नया मुकदमा केवल जमानत का लाभ रोकने के उद्देश्य से दर्ज किया गया। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल को आरोपी को राहत देते हुए नई एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण करार दिया था। अब राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इसी जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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