Saturday, 29 August 2026

हिरासत में मौतों पर सख्त हुआ पुलिस मुख्यालय, थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी


हिरासत में मौतों पर सख्त हुआ पुलिस मुख्यालय, थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी

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जयपुर। पुलिस हिरासत में मौत और मानवाधिकार उल्लंघन के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी थानों और पुलिस अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इन निर्देशों में गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच, पूछताछ की निगरानी, लॉकअप निरीक्षण और प्रत्येक कार्रवाई का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच प्रदेश में पुलिस हिरासत में मौत के 21 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद पुलिस विभाग पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इसी को देखते हुए अतिरिक्त महानिदेशक (सिविल राइट्स एवं कम्युनिटी पुलिसिंग) डॉ. हवासिंह घुमरिया ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नई गाइडलाइन के अनुसार किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के तुरंत बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। यदि आरोपी बीमार है, नशे की हालत में है या उसके शरीर पर चोट के निशान हैं तो उसका पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर हिरासत के दौरान दोबारा मेडिकल जांच भी कराई जाएगी।

पुलिस मुख्यालय ने पूछताछ प्रक्रिया की निगरानी को भी अनिवार्य कर दिया है। थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग होगी और फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पूछताछ के दौरान किसी प्रकार की मारपीट या अमानवीय व्यवहार न हो।

निर्देशों में गिरफ्तारी की सूचना तुरंत परिजनों को देने, गिरफ्तारी रिकॉर्ड अपडेट करने और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके अधिकारों की जानकारी देने पर भी विशेष जोर दिया गया है। थाना प्रभारी और सर्किल अधिकारियों को लॉकअप का नियमित निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि हिरासत में मौत या गंभीर प्रताड़ना की शिकायत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकना है।

नई व्यवस्था के तहत थानों में संवेदनशीलता बढ़ाने, रिकॉर्ड प्रणाली को मजबूत करने और नियमित निरीक्षण पर विशेष फोकस किया जाएगा। पुलिस विभाग ने गिरफ्तारी, पूछताछ और लॉकअप प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

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