Saturday, 09 May 2026

राजस्थान से बंगाल तक अशोक कीर्तनिया का सफर, सुवेंदु सरकार में बने कैबिनेट मंत्री


राजस्थान से बंगाल तक अशोक कीर्तनिया का सफर, सुवेंदु सरकार में बने कैबिनेट मंत्री

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार, 9 मई को नया इतिहास लिखा गया, जब सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हालांकि इस समारोह में राजस्थान से जुड़े एक खास चेहरे ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया। यह चेहरा था अशोक कीर्तनिया का, जिन्हें सुवेंदु सरकार में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

अशोक कीर्तनिया आज भले ही बंगाल की राजनीति का प्रमुख चेहरा बन चुके हों, लेकिन उनकी जड़ें राजस्थान की भूमि से जुड़ी हैं। वे उन प्रवासी राजस्थानी परिवारों में से हैं, जो वर्षों पहले व्यापार और रोजगार के सिलसिले में राजस्थान से पश्चिम बंगाल जाकर बसे थे। राजनीतिक रूप से बंगाल में सक्रिय रहने के बावजूद उनका राजस्थान से सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी कायम है।

अशोक कीर्तनिया भाजपा के उन पांच विजयी प्रवासी राजस्थानी नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। उन्होंने पहली बार वर्ष 2021 में बनगांव उत्तर (SC) सीट से जीत हासिल की थी। वर्ष 2026 के चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखते हुए लगभग 40 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अशोक कीर्तनिया की लोकप्रियता विशेष रूप से मतुआ समुदाय और सीमावर्ती क्षेत्रों में काफी मजबूत मानी जाती है। भाजपा की पश्चिम बंगाल में मिली बड़ी सफलता में मतुआ वोट बैंक को एकजुट करने में उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है। इसी वजह से उन्हें बंगाल के प्रभावशाली दलित नेताओं में भी गिना जाता है।

करीब 52 वर्षीय अशोक कीर्तनिया राजनीति के साथ-साथ व्यवसायिक पृष्ठभूमि भी रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीनबंधु महाविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। उनकी संगठनात्मक क्षमता और लोगों से जुड़ने की शैली ने भाजपा को बंगाल में संगठन विस्तार में भी मदद पहुंचाई।

पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने रणनीतिक तौर पर राजस्थान मूल के नौ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जिनमें से पांच उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इसे भाजपा की बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में प्रवासी राजस्थानी समुदाय अब प्रभावशाली राजनीतिक भूमिका निभाने लगा है।




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