Saturday, 09 May 2026

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने SI भर्ती-2021 परीक्षा रद्द की, चयनित अभ्यर्थियों का जयपुर में सत्याग्रह, न्याय की मांग तेज


राजस्थान लोक सेवा आयोग ने SI भर्ती-2021 परीक्षा रद्द की, चयनित अभ्यर्थियों का जयपुर में सत्याग्रह, न्याय की मांग तेज

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जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने राज्य सरकार की सिफारिश के बाद उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 को रद्द कर दिया है। आयोग ने इस संबंध में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सूचना जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अब यह परीक्षा नए सिरे से आयोजित की जाएगी। इस फैसले के बाद भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों के बीच असंतोष और नाराजगी बढ़ गई है।

भर्ती रद्द होने के विरोध में चयनित एसआई अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने शुक्रवार को जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर सत्याग्रह किया। इस दौरान धरियावद से भारतीय आदिवासी पार्टी के विधायक थावरचंद डामोर भी धरनास्थल पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान चयनित महिला अभ्यर्थी संतोष कुमारी खराड़ी ने अपनी पुलिस वर्दी विधायक को सौंपते हुए न्याय दिलाने की अपील की।

धरने में शामिल अभ्यर्थियों ने ट्रेनी एसआई स्वर्गीय राजेंद्र सैनी की तस्वीर भी हाथों में ले रखी थी। भरतपुर निवासी राजेंद्र सैनी के परिवार ने मंच से कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद वे मानसिक तनाव में थे और इसी कारण उन्होंने मालगाड़ी के आगे आकर आत्महत्या कर ली। परिवार ने आरोप लगाया कि सरकार के फैसले से अन्य अभ्यर्थियों पर भी गंभीर मानसिक दबाव बन रहा है।

इस बीच आरपीएससी द्वारा भर्ती दोबारा आयोजित करने के निर्णय पर भी चयनित अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार क्या उनके जीवन के खराब हुए पांच वर्ष वापस लौटा सकती है। अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि इतने लंबे समय बाद फिर से परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए बेहद कठिन है।

संतोष कुमारी खराड़ी ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी कर निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों और ईमानदारी से चयनित उम्मीदवारों में अंतर कर सकती है और निर्दोष अभ्यर्थियों को सजा नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया के अभ्यर्थी पहले ही दो बार परीक्षा दे चुके हैं। एक बार चयन के लिए और दूसरी बार एसओजी जांच के दौरान। अब बार-बार खुद को सही साबित करने के लिए दोबारा परीक्षा देना अन्यायपूर्ण है। संतोष ने भावुक होते हुए कहा कि वे पहले ग्राम सेवक रह चुकी हैं और परिवार तथा बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच लगातार परीक्षाएं देना संभव नहीं है।

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