Saturday, 02 May 2026

आरजीएचएस योजना पर संकट गहराया, मानवाधिकार आयोग ने लिया सुओ मोटो संज्ञान, 2200 करोड़ भुगतान अटका


आरजीएचएस योजना पर संकट गहराया, मानवाधिकार आयोग ने लिया सुओ मोटो संज्ञान, 2200 करोड़ भुगतान अटका

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राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी आरजीएचएस योजना इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है, जिससे लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी प्रभावित हो रहे हैं। जो योजना कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए शुरू की गई थी, वही अब खुद व्यवस्था के अभाव में चरमराती नजर आ रही है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस पूरे मामले पर सुओ मोटो संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

1 मई 2026 को जारी आदेश में आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सूचीबद्ध अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों से इलाज से वंचित किया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमारी के दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। आयोग के अनुसार, योजना का उद्देश्य मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं और दवाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन हाल के महीनों में इसके क्रियान्वयन में गंभीर बाधाएं सामने आई हैं।

इस संकट की मुख्य वजह सरकार पर बकाया भारी भुगतान को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और केमिस्टों को पिछले 8 से 9 महीनों से भुगतान नहीं किया गया है। कुल बकाया राशि लगभग 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। भुगतान में देरी के चलते कई निजी अस्पतालों ने योजना से दूरी बना ली है, जबकि कई जगहों पर कैशलेस सुविधा बंद कर दी गई है, जिससे मरीजों को मजबूरन अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।

प्रदेश के विभिन्न शहरों—जयपुर, जोधपुर और बीकानेर—में स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है, जहां लाभार्थियों को दवाइयों के लिए ‘नो स्टॉक’ या ‘कैशलेस सेवा बंद’ जैसे जवाब मिल रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों में इस बात को लेकर खासा रोष है कि उनकी सैलरी से हर महीने RGHS के लिए कटौती तो हो रही है, लेकिन जरूरत के समय उन्हें बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा।

अब इस पूरे मामले में नजरें भजनलाल शर्मा सरकार पर टिकी हैं। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद शासन सचिवालय में हलचल तेज हो गई है। आयोग ने सरकार से भुगतान में देरी के कारणों, जिम्मेदारियों और व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए ठोस रोडमैप प्रस्तुत करने को कहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस वित्तीय और प्रशासनिक संकट से कैसे निपटती है।

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