



जयपुर। करोड़ों रुपए की जमीन पर कथित कब्जे के मामले में घिरे जयपुर के बजरी और भू माफिया प्रमोद शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और इस स्तर पर एफआईआर को रद्द करना उचित नहीं होगा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस अभी जांच कर रही है और आरोपियों को केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने और बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस दिया गया है।
वहीं प्रमोद शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एस. होरा ने दलील दी कि यह विवाद सिविल प्रकृति का है और इसमें आपराधिक मामला नहीं बनता, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
परिवादी घनश्याम शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र और अधिवक्ता गिर्राज प्रसाद शर्मा ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में करीब 7500 वर्ग गज जमीन पर जबरन कब्जा किया है। इस संबंध में 13 जुलाई 2025 को मानसरोवर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि उक्त भूमि को लेकर पथिक गृह निर्माण सहकारी समिति और नवजीवन गृह निर्माण सहकारी समिति के बीच विवाद चल रहा है और इस जमीन पर सिविल कोर्ट का पहले से ही स्टे लागू है। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा कब्जा करना न केवल अवैध है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवमानना भी माना जा सकता है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले की जांच जारी रहेगी और आने वाले समय में पुलिस की कार्रवाई तेज होने की संभावना है।