Saturday, 29 August 2026

कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 घोटाले में बड़ा खुलासा: 145 नियुक्तियां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर, 6 साल का रिकॉर्ड गायब


कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 घोटाले में बड़ा खुलासा: 145 नियुक्तियां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर, 6 साल का रिकॉर्ड गायब

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जयपुर। कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 मामले में जयपुर जिला परिषद और पंचायत समितियों में हुए कथित भर्ती घोटाले को लेकर गठित जांच कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट में कई सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। कलेक्टर के निर्देश पर गठित कमेटी ने 627 अभ्यर्थियों की जांच की, जिसमें 145 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन अभ्यर्थियों को फर्जी दस्तावेजों, नियम विरुद्ध बोनस अंक और अवैध प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्तियां दी गईं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब जांच कमेटी ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड मांगे, तो जयपुर जिला परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों ने वर्ष 2013 से 2019 तक का भर्ती रिकॉर्ड, नोटशीट, रोस्टर और मेरिट लिस्ट गायब होना बताया। इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

तत्कालीन एडीएम (तृतीय) कुंतल विश्नोई की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने स्पष्ट किया है कि भर्ती शाखा के डीलिंग बाबू और प्रभारी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज स्वीकार किए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित कार्मिकों ने रिकॉर्ड नष्ट करने, छिपाने या खुर्द-बुर्द करने जैसे प्रयास किए। जांच रिपोर्ट एडीएम-3 कुंतल विश्नोई के नेतृत्व में बृजमोहन गुप्ता (एसीईओ), ईश्वर सिंह (अधिशाषी अभियंता), जय श्री जांगिड (लेखाधिकारी) और मनोज भारती (संस्थापन भर्ती) द्वारा सौंपी गई।

जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताएं:

1. समान अवधि का चमत्कार: दर्जनों अभ्यर्थियों ने एक ही समय में संविदा नौकरी का अनुभव और दूसरे राज्यों से नियमित डिग्री दिखाईं। कई डिग्रियों का रिकॉर्ड संबंधित विश्वविद्यालयों में नहीं मिला।

2. बोनस अंकों में गड़बड़ी: पात्रता नहीं होने के बावजूद कई अभ्यर्थियों को 10 से 30 बोनस अंक दिए गए और नियम विरुद्ध अनुभव प्रमाण पत्र जारी किए गए।

3. अवैध घोषित यूनिवर्सिटी से डिग्रियां: मेघालय, सिक्किम, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात की ऑफ-कैंपस डिग्रियों के आधार पर नियुक्तियां दी गईं, जिन्हें पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है।

4. फर्जी आरएस-सीआईटी कोड: कई नियुक्तियां ऐसे कंप्यूटर सर्टिफिकेट पर हुईं जिनका रिकॉर्ड वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में नहीं मिला।

5. रिकॉर्ड गायब: 2013 से 2019 तक की भर्ती फाइलें, नोटशीट, रोस्टर और मेरिट लिस्ट जांच कमेटी को उपलब्ध नहीं कराई गई।

6. एक्स-सर्विसमैन कोटे में गड़बड़ी:कई अभ्यर्थियों ने सेना में सेवा के दौरान नियमित कंप्यूटर कोर्स करने का दावा किया, जिसकी सत्यापन की सिफारिश की गई है।

7. मेडिकल और शपथ पत्र में अनियमितता: महिला अभ्यर्थियों के मामलों में शपथ पत्र से बाल विवाह की जानकारी सामने आई। संदिग्ध मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर भी ज्वाइनिंग दी गई।

8. आयु और दिव्यांग कोटा उल्लंघन: नियमों से अधिक आयु के अभ्यर्थियों और दिव्यांग कोटे में भी नियम विरुद्ध नियुक्तियां की गईं।

एसीबी कार्रवाई लंबित

भर्ती मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत कार्रवाई के लिए नितेश टाटीवाल, मुकेश शर्मा, संदीप वर्मा, रुपेंदर सिंह, नरेन्द्र यादव और हरीश वर्मा के खिलाफ अनुमति मांगी गई है, लेकिन विभाग स्तर पर अनुमति अभी लंबित बताई जा रही है।

पंचायत समितियों से मिलीं फाइलें

जांच कमेटी को विभिन्न पंचायत समितियों से अभ्यर्थियों की फाइलें प्राप्त हुई हैं। इनमें गोविंदगढ़ (51), विराटनगर (26), कोटपूतली (37), किशनगढ़-रेनवाल (26), जमवारामगढ़ (35), मौजमाबाद (25), शाहपुरा (35), जोबनेर (25), सांगानेर (32), सांभरलेक (24), बस्सी (30), तूंगा (23), पावटा (30), कोटखावदा (23), झोटवाड़ा (29), आमेर (21), चाकसू (27) और दूदू (20) शामिल हैं।

इस अंतरिम रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब सबकी नजर अंतिम रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

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