Saturday, 25 April 2026

मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को एक माह में फिर से जन उपयोगी बनाने के हाईकोर्ट के निर्देश


मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को एक माह में फिर से जन उपयोगी बनाने के हाईकोर्ट के निर्देश

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जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के सामुदायिक भवन को आगामी एक माह में पूर्व की भांति आमजन के उपयोग के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शोभा मेहता की खंडपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कोर्ट को अवगत कराया कि जेडीए ने अपने जोन कार्यालय 18 और 19 को मुख्यालय में शिफ्ट कर दिया है। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि आगामी एक माह के भीतर सामुदायिक भवन को पूर्व की भांति सुविधायुक्त बनाकर आमजन के उपयोग के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।

जनहित याचिका की पैरवी करते हुए अधिवक्ता तपिश सारस्वत, अनिश भदाला और निधि बिस्सा ने कोर्ट के समक्ष जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि जेडीए द्वारा सामुदायिक भवन के सभागार में पार्टीशन कर दिए जाने के कारण उसका उपयोग जनहित में नहीं हो पा रहा है। वर्तमान स्थिति में भवन अपनी मूल उपयोगिता खो चुका है और आमजन को इससे वंचित होना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि सामुदायिक भवन को तत्काल पूर्व की स्थिति में बहाल करने के निर्देश दिए जाएं ताकि आम लोगों को फिर से इसकी सुविधाएं मिल सकें।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए जेडीए के अधिवक्ता अमित कुड़ी को निर्देशित किया कि आगामी एक माह में सामुदायिक भवन को पूर्व की भांति जन उपयोगी बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें और इसकी अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें।

जनहित याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा ने हाईकोर्ट के इस निर्णय पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ साल के लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय ने जनहित में फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि इस आदेश से मानसरोवर स्थित पत्रकार कॉलोनी के आम नागरिकों को सामुदायिक भवन की सुविधा फिर से मिल सकेगी और सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन में सहूलियत होगी। यह फैसला जनहित से जुड़े मामलों में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है और इससे स्थानीय नागरिकों में खुशी का माहौल है।

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