



जयपुर। राजस्थान सरकार ने पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक चाइनीज मांझे (काइट फ्लाइंग थ्रेड) के उपयोग, बिक्री और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से दो दिन पहले जारी अधिसूचना में यह आदेश लागू किया गया है। अब प्रतिबंधित धागे का उपयोग, बिक्री, भंडारण या सप्लाई करने पर न सिर्फ भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि जेल की सजा भी हो सकती है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल सादा सूती धागा, जिसमें किसी प्रकार का कांच, धातु, रासायनिक या चिपकाने वाला पदार्थ न लगा हो, उसी का उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा नायलॉन, प्लास्टिक या किसी भी सिंथेटिक सामग्री से बने धागों पर पूरी तरह रोक रहेगी। यदि कोई सूती धागा भी कांच, धातु या अन्य धारदार पदार्थ से लेपित पाया जाता है, तो वह भी प्रतिबंधित माना जाएगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि नायलॉन, प्लास्टिक या सिंथेटिक धागे तथा कांच, धातु या अन्य धारदार पदार्थ से लेपित मांझा मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मांझे से हर साल सड़क दुर्घटनाएं, गले कटने की घटनाएं और पक्षियों की मौत के मामले सामने आते हैं।
यह निर्णय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 11 जुलाई 2017 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। एनजीटी ने राज्यों को ऐसे खतरनाक धागों के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार चाइनीज मांझा/सिंथेटिक धागे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, सप्लाई, आयात, परिवहन और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकार ने इसे लेकर सख्त दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए हैं।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत आदेशों या निर्देशों के उल्लंघन पर दोषी व्यक्ति या संस्था को 5 वर्ष तक की कैद, ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यदि उल्लंघन जारी रहता है तो ₹5,000 प्रतिदिन का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, लंबे समय तक उल्लंघन जारी रहने पर सजा को बढ़ाकर 7 साल तक की कैद किया जा सकता है।
राज्य सरकार ने आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें नायब तहसीलदार स्तर तक के कार्यपालक मजिस्ट्रेट, फॉरेस्ट रेंजर या उससे ऊपर के वन अधिकारी, सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी, नगर निकायों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी स्तर के अधिकारी और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता शामिल हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन की भूमिका भी तय की गई है। कलेक्टर और उपखंड मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व, वन, पुलिस और नगर निकायों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर त्वरित कार्रवाई करें। वहीं राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन और सदस्य सचिव समय-समय पर इन निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे।
राज्य सरकार के इस फैसले को मानव जीवन, पशु-पक्षियों और पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब आने वाले दिनों में प्रशासन की सख्ती के बाद बाजारों में चाइनीज मांझे की बिक्री पर लगाम लगने की उम्मीद है।