



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी में हुई आग की घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस घटना को सामान्य हादसा मानने से इनकार करते हुए कहा कि नई रिफाइनरी में इस तरह की आग लगना असामान्य है और इसके पीछे तोड़फोड़ या साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। गहलोत ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जिस परियोजना का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीद्वारा किया जाना था, वहां इस तरह की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में पहले से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है, फिर भी इस तरह की घटना होना चिंताजनक है।
उन्होंने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि आमतौर पर पुरानी रिफाइनरियों में इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन नई और अत्याधुनिक रिफाइनरी में आग लगना या तो तकनीकी चूक, लापरवाही या जल्दबाजी में काम पूरा करने के दबाव का परिणाम हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और उत्पादन से पहले सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने इस घटना के संभावित कारणों में तकनीकी खामी, मानवीय चूक और यहां तक कि सबोटाज (तोड़फोड़) की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए और जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रदेश के किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कर्ज माफी की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और सरकार को पूर्व की तरह कर्ज माफी का निर्णय लेना चाहिए। साथ ही महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि अभी तक महिला आयोग की अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है और महिलाओं को दिए गए आरक्षण संबंधी वादे भी अधूरे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि बिना पैसे के कोई काम नहीं हो रहा और भ्रष्टाचार गांव स्तर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करनी चाहिए और पारदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए।