



जयपुर। बार काउंसिल आफ राजस्थान चुनाव के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर स्थित पोलिंग बूथ पर अव्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। मतदान प्रक्रिया के दौरान कई बूथों पर मतपत्रों में गड़बड़ी, देर से शुरुआत और आवश्यक व्यवस्थाओं की कमी की शिकायतें मिलीं, जिससे अधिवक्ताओं और प्रत्याशियों में नाराजगी बढ़ गई।
स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब फर्जी वोटिंग के आरोपों को लेकर हंगामा हो गया। करीब एक घंटे तक मतदान प्रक्रिया बाधित रही। कई उम्मीदवारों ने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। बढ़ते विवाद को देखते हुए पोलिंग ऑफिसर ने अंततः हाईकोर्ट पोलिंग बूथ पर चुनाव रद्द करने की घोषणा कर दी।
गौरतलब है कि यह बूथ प्रदेश का सबसे बड़ा मतदान केंद्र माना जाता है, जहां सबसे अधिक अधिवक्ता मतदाता पंजीकृत हैं। ऐसे में यहां चुनाव रद्द होने से पूरे चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ना तय है। अब इस बूथ के लिए नई मतदान तिथि जल्द घोषित की जाएगी।
यह घटनाक्रम बार काउंसिल चुनाव की पारदर्शिता और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें चुनाव प्राधिकरण पर हैं कि नई तारीख के साथ निष्पक्ष और सुचारु मतदान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
इससे पहले सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतदान प्रक्रिया जयपुर हाईकोर्ट बूथ पर करीब 50 मिनट की देरी से शुरू हुई थी, जहां 94 वर्षीय रिटायर्ड जस्टिस विजय शंकर दवे ने पहला वोट डालकर मतदान की शुरुआत की थी। हालांकि बाद में फर्जी वोटिंग के आरोप सामने आने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और चुनाव अधिकारियों को मतदान निरस्त करने का निर्णय लेना पड़ा।
करीब तीन साल की देरी के बाद और आठ वर्षों के अंतराल पर हो रहे इन चुनावों में 23 पदों के लिए 234 प्रत्याशी मैदान में हैं। प्रदेशभर में कुल 258 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जहां लगभग 84,247 अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इससे पहले बार काउंसिल के चुनाव वर्ष 2018 में हुए थे।
जयपुर हाईकोर्ट बूथ पर हुए इस घटनाक्रम ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें चुनाव प्रबंधन पर हैं कि नए मतदान की तारीख कब घोषित की जाएगी और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
